इस्लाम में तौबा (माफ़ी) और गुनाहों से परहेज़ करने की बहुत अहमियत है। अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों को माफ़ करने वाला है, ख़ास तौर पर जब वे उन पर शर्मिंदा होते हैं और उन्हें छुपाते हैं। लेकिन एक ख़ास तरह का गुनाह ऐसा है जिसे करने वालों को माफ़ नहीं किया जाएगा इल्लाह! माशाअल्लाह (यानी अल्लाह जिसे लिए चाहे मुआफ कर दे)। क्या आप जानते हैं वो कौन सा गुनाह है?
सवाल: रसूलअल्लाह ﷺ ने किन के लिए फरमाया कि उनको कभी माफ़ नहीं किया जाएगा?
- A. ज़िना करने वाले
- B. बिदअत करने वाले
- C. गुनाह खुले आम करने वाले
सही जवाब है: ऑप्शन C. गुनाह खुले आम करने वाले।
इसकी दलील हदीस में मौजूद है, जहाँ अल्लाह के रसूल ﷺ ने इस बात की अहमियत पर ज़ोर दिया कि अपने गुनाहों को छुपा कर रखा जाए, बजाय इसके कि उनका दिखावा किया जाए।
दलील (सबूत):
हदीस: हज़रत अबू हुरैरा (र.अ.) से रिवायत है कि रसूल-अल्लाह ﷺ ने फरमाया: “मेरी पूरी उम्मत को माफ़ किया जाएगा, सिवाए उन लोगों के जो गुनाहों को खुले आम करते हैं। और इसमें यह भी शामिल है कि एक शख्स रात में कोई गुनाह करे, फिर अल्लाह उसको छुपा दे, लेकिन वो सुबह उठकर कहता है: ‘कल रात मैंने यह गुनाह किया था।’ रात उसके रब ने उसका गुनाह छुपाए रखा, लेकिन वो खुद अल्लाह के पर्दे को खोल देता है।”
– सहीह बुखारी, वॉल्यूम 7, हदीस 6069



