इबादत

नमाज़, रोज़ा, ज़कात और हज जैसे इबादत से जुड़े सभी सवाल और जवाब।

Zakaat ka asal maksad

इस्लाम में ज़कात का असल मक़सद क्या है?

इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक ज़कात है, जिसे हर साहिब-ए-निसाब (जिसके पास ज़रूरी माल हो) मुसलमान पर फ़र्ज़ किया गया है। लेकिन, क्या […]

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Ramzan Raat Quran Nuzool

रमज़ान के महीने की वह बरकत वाली रात कौन-सी है जब कुरआन नाज़िल हुआ?

रमज़ान का महीना अपनी बरकतों और रहमतों के लिए जाना जाता है, लेकिन इस पाक महीने में एक ऐसी रात है जिसकी अहमियत हजारों महीनों

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“एक दाने को सात बाली निकले और उन हर बालीयों में से सौ-सौ दाने निकले” – यह मिसाल अल्लाह ने कुरान में किन लोगों के ताल्लुक से बयान की है?

क़ुरान-ए-मजीद इंसान को नेकियों के लिए तरग़ीब दिलाने के लिए कई जगह बेहद खूबसूरत मिसालें देता है। उनमें से एक मिसाल है – एक दाने से

“एक दाने को सात बाली निकले और उन हर बालीयों में से सौ-सौ दाने निकले” – यह मिसाल अल्लाह ने कुरान में किन लोगों के ताल्लुक से बयान की है? जवाब देखे »

क्या बीवी शौहर को ज़कात दे सकती है?

ज़कात इस्लाम का एक अहम फ़र्ज़ है और इसकी अदायगी का सही तरीका जानना हर मुसलमान के लिए ज़रूरी है। अक्सर घरों में यह सवाल

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रोज़े का असल मक़सद क्या है?

रमज़ान का महीना बरकतों और रहमतों से भरा हुआ है। लेकिन रोज़े का असल मक़सद सिर्फ भूखे-प्यासे रहना या इफ़्तार की दावतें करना नहीं है,

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रोज़ा किसके लिए रखा जाता है?

इस्लाम में रोज़ा एक इबादत है, लेकिन इसका मक़सद और निशाना साफ़ तौर पर अल्लाह तआला की रज़ा हासिल करना है। रोज़ा दिखावे या रस्म

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इनमें से कौन सा अमल रीया यानी शिर्क-ए-असगर है?

इबादत हमेशा अल्लाह की रजा  के लिए होनी चाहिए, न कि लोगों की तारीफ़ पाने के लिए। लेकिन कुछ काम ऐसे हैं जो दिखावे (रीया) के

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क़यामत के दिन सबसे पहले जो मामला हाज़िर किया जाएगा वो किन का होगा?

क़यामत का दिन वह दिन है जब हर इंसान को अपने आमाल का हिसाब देना होगा। उस दिन इंसान की छोटी-बड़ी सब ज़िम्मेदारियाँ खुलकर सामने

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वो कौन सा अमल है जिसके करने से इंसान को अल्लाह तआला 100 साल के बराबर जहन्नुम से दूर कर देगा?

हर नेक अमल का इंसान को दुनिया और आख़िरत में बड़ा इनाम मिलता है। लेकिन कुछ ख़ास अमल ऐसे हैं जिनकी फ़ज़ीलत इतनी अज़ीम है

वो कौन सा अमल है जिसके करने से इंसान को अल्लाह तआला 100 साल के बराबर जहन्नुम से दूर कर देगा? जवाब देखे »

क़ुरान-ए-करीम में वो कौन सी सूरह है जिसमें एक ही आयत-ए-करीमा 31 बार आई है?

क़ुरान-ए-करीम अल्लाह की किताब है जिसमें हर आयत इंसानों के लिए रहनुमाई और सबक़ है। कुछ सूरहों में आयात का बार-बार दोहराया जाना हमें गहरी

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किसकी मिसाल रस्सी से बंधे ऊंट के मालिक जैसी है, अगर वो उसकी निगरानी रखेगा तो उसे रोक सकेगा, वरना रस्सी तुड़वाकर ऊंट भाग जाएगा?

क़ुरान को याद करना बहुत बड़ा शरफ़ है, लेकिन इसे संभालकर रखना और उसकी हिफ़ाज़त करना उससे भी ज़्यादा अहम है। नबी-ए-करीम ﷺ ने हाफ़िज़-ए-क़ुरान

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वो कौन-सी रात है जब अल्लाह तआला आसमानी दुनिया पर नुज़ूल फरमाता है और फरमाता है “कौन है मांगने वाला जिसे मैं अता करूं?”

क्या आप जानते हैं कि अल्लाह तआला हर रात अपने बंदों से ख़ास अंदाज़ में रहमत और मग़फिरत की पुकार करता है? ये कोई एक

वो कौन-सी रात है जब अल्लाह तआला आसमानी दुनिया पर नुज़ूल फरमाता है और फरमाता है “कौन है मांगने वाला जिसे मैं अता करूं?” जवाब देखे »

शब-ए-क़द्र को क़ुरआन में किस से बेहतर कहा गया है?

शब-ए-क़द्र (लैलतुल क़द्र) इस्लाम की सबसे मुबारक रातों में से एक है। यह वह रात है जिसमें क़ुरआन-ए-करीम का नुज़ूल हुआ और जिसमें बंदे की

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क़यामत के दिन गंजे साँप का तौक़ किस शख़्स को पहनाया जाएगा?

ज़कात इस्लाम का एक अहम स्तंभ है जो समाज में बराबरी और रहमत का कारण बनता है। लेकिन जो लोग ज़कात अदा नहीं करते, उनके

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रसोअल्लाह (ﷺ) ने औरतों के ईदगाह जाने के बारे में क्या फरमाया है?

इस्लाम ने औरतों को इबादत और नेकियों में हिस्सा लेने से नहीं रोका, बल्कि उन्हें भी अल्लाह की रहमत के मौकों पर शामिल होने की

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वो कौन सी दो नमाज़ें हैं जो मुनाफ़िक़ों पर ज़्यादा भारी हैं?

इस्लाम में नमाज़ ईमान की पहचान और बंदे के अल्लाह से सीधे रिश्ता रखने का ज़रिया है। लेकिन कुछ नमाज़ें ऐसी हैं जो मुनाफ़िक़ों (दिखावे

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वो कौन सी नेकी है जो इंसान को बेहयाई और बुराई से रोकती है?

अल्लाह तआला ने इंसान को नेकियों की हिदायत दी है ताकि वो गुनाहों और फितनों से दूर रह सके। लेकिन क्या आप जानते हैं कि

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वो कौन से लोग हैं जिनके लिए रसूलअल्लाह ﷺ तीन मरतबा बख्शिश की दुआ करते थे?

नमाज़ में जमात का बहुत बड़ा दर्जा है और इसमें पहली सफ़ (लाइन) में खड़े होने वालों के लिए अल्लाह और उसके रसूल ﷺ ने खास फज़ीलत

वो कौन से लोग हैं जिनके लिए रसूलअल्लाह ﷺ तीन मरतबा बख्शिश की दुआ करते थे? जवाब देखे »

जब अज़ान सुनो और ये अल्फ़ाज़ आए “हय्या अलस्सलाह” तो इन में से क्या कहना चाहिए?

जब अज़ान की पुकार गूँजती है, तो यह हमें अल्लाह की याद और नमाज़ की दावत की याद दिलाती है। लेकिन बहुत से लोग नहीं

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जो शख्स रात को तहज्जुद पढ़ने के लिए बेदार नहीं हो सके, तो वो कौन-सा अमल करे?

हर मुसलमान की तमन्ना होती है कि वह रात के सुकून भरे लम्हों में उठकर तहज्जुद की नमाज़ अदा करे, लेकिन बहुत से लोग चाहकर

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सहाबा ने रमज़ान में रसूल-अल्लाह ﷺ के साथ तरावीह कितनी रात पढ़ी?

हर साल रमज़ान में यह सवाल ज़रूर उठता है कि सहाबा ने रसूल-अल्लाह ﷺ के साथ कितनी रात तरावीह अदा की थी। आइए इस मुकम्मल

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रमज़ान की (रातों में) नमाज़ पढ़ने की फ़ज़ीलत क्या है?

रमज़ान की रातें अल्लाह की रहमतों से भरी होती हैं। बहुत से लोग यह जानना चाहते हैं कि इन रातों में की जाने वाली नमाज़

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रमज़ान के एक महीने के रोज़े कितने महीनों के रोज़ों के बराबर हैं?

रमज़ान का महीना सिर्फ बरकतों का नहीं बल्कि बेशुमार सवाब का भी मौसम है। अल्लाह तआला ने इस महीने के रोज़ों में इतनी बरकत रखी

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रमज़ान के महीने में एक बार “सुब्हानअल्लाह” कहना बाकी दिनों में कितनी बार कहने से बेहतर है?

रमज़ान का महीना रहमतों और बरकतों से भरा होता है। इस मुबारक महीने में हर नेकी और इबादत का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता

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रोज़ेदार अगर एनेस्थेटिक इंजेक्शन (बेहोश करने वाला इंजेक्शन) ले तो क्या होगा?

रोज़े के दौरान मेडिकल ज़रूरतें कभी-कभी उलझन पैदा कर देती हैं—ख़ासकर इंजेक्शन, दवाई या इलाज के मामले में। एक आम सवाल यह है कि बेहोशी देने

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रमज़ान के एक महीने के रोज़े कितने महीनों के रोज़ों के बराबर हैं?

रमज़ान बरकतों और रहमतों का महीना है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिर्फ एक महीने के रोज़े कितने महीनों के रोज़ों के बराबर होते हैं? हदीस

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रोज़े का असल मक़सद क्या है?

रोज़ा सिर्फ़ भूख-प्यास सहने का नाम नहीं, बल्कि रूह की पाकीज़गी का सफ़र है।अल्लाह ने इसे एक ऐसे मक़सद के लिए फ़र्ज़ किया है जो

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क़यामत के दिन सबसे लंबी गर्दन किसकी होगी?

अज़ान देना सिर्फ़ नमाज़ की पुकार नहीं, बल्कि इस्लाम की पहचान और ईमान की गवाही है। अल्लाह के रसूल ﷺ ने अज़ान देने वालों को

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अल्लाह सुब्हानहु कौन-सी रात आसमान-ए-दुनिया की तरफ नुज़ूल फ़रमाता है और कहता है: “कौन है जो मुझसे दुआ करे कि मैं उसकी दुआ क़बूल करूं?”

अल्लाह तआला अपने बन्दों पर बेहद रहम करने वाला है। वह हर रात आसमान-ए-दुनिया की तरफ नुज़ूल फ़रमाता है और खुद पुकार कर रहमत के दरवाज़े खोल

अल्लाह सुब्हानहु कौन-सी रात आसमान-ए-दुनिया की तरफ नुज़ूल फ़रमाता है और कहता है: “कौन है जो मुझसे दुआ करे कि मैं उसकी दुआ क़बूल करूं?” जवाब देखे »

नमाज़ में क़ुरआन भुला देने वाले शैतान का नाम क्या है?

क्या कभी आपने नमाज़ में ध्यान भटकते हुए या क़ुरआन की आयतें भूलते हुए महसूस किया है?ये भूलना सिर्फ़ लापरवाही नहीं — बल्कि एक ख़ास शैतान

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