क़ुरबानी कितने दिन तक कर सकते हैं?
ईद-उल-अज़हा की सबसे अहम इबादतों में से एक है क़ुरबानी। अक्सर लोग यह सवाल करते हैं कि आखिर क़ुरबानी कितने दिन तक की जा सकती […]
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नमाज़, रोज़ा, ज़कात और हज जैसे इबादत से जुड़े सभी सवाल और जवाब।
ईद-उल-अज़हा की सबसे अहम इबादतों में से एक है क़ुरबानी। अक्सर लोग यह सवाल करते हैं कि आखिर क़ुरबानी कितने दिन तक की जा सकती […]
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क़ुरबानी इस्लाम में सबसे महत्वपूर्ण इबादतों में से एक है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि क़ुरबानी किसके लिए करनी चाहिए? सवाल: क़ुरबानी किसके लिए करने
क़ुरबानी किसके लिए करने का हुक्म आया है? जवाब देखे »
ईद-उल-अज़हा के दिनों में मुसलमानों के दिल में अक्सर यह सवाल आता है कि क़ुरबानी किस वक़्त से शुरू की जा सकती है और कब तक
क़ुरबानी का वक़्त कब से शुरू होता है? जवाब देखे »
ईद-उल-अज़हा पर हर मुसलमान यह सवाल ज़रूर सोचता है कि क्या एक जानवर पूरी फैमिली की तरफ़ से क़ुरबान किया जा सकता है? या फिर हर शख़्स
एक जानवर कितने लोगों की तरफ़ से क़ुरबान किया जा सकता है? जवाब देखे »
ईद-उल-अज़हा की क़ुरबानी सिर्फ़ एक इबादत नहीं बल्कि इंसानियत और तक़वा का पैग़ाम भी है। सवाल ये उठता है कि क़ुरबानी का गोश्त हमें क्या
क़ुरबानी का गोश्त क्या करें? जवाब देखे »
इस्लामी इतिहास में कुछ ऐसे वाक़ये हैं जिनकी अहमियत बहुत ज़्यादा है, और इस्रा व मेराज उनमें से एक है। यह एक ऐसा अनोखा सफ़र
इस्रा व मेराज का वाक़िआ मुसलमानों के लिए ख़ास है, क्योंकि इसी रात – जवाब देखे »
रमज़ान का महीना अपनी बरकतों और रहमतों के लिए जाना जाता है, लेकिन इसके आखिरी 10 दिन एक ख़ास तरीक़े की इबादत की जाती है।
रमज़ान के आख़िरी 10 दिनों में कौन-सी ख़ास इबादत की जाती है? जवाब देखे »
क़ुरबानी एक अहम इबादत है जो तक़वा, ईमान और अल्लाह की बंदगी की निशानी है। बहुत से लोग यह सवाल करते हैं कि क्या क़ुरबानी
क़ुरबानी का अमल किस उम्मत के लिए अल्लाह ने अता किया? जवाब देखे »
हज के दिनों में 9 ज़िल-हिज्जा का दिन बहुत अहमियत रखता है। यह दिन हाजियों और तमाम मुसलमानों के लिए ख़ास फ़ज़ीलत वाला माना जाता
9 ज़िल-हिज्जा के दिन को क्या कहते हैं? जवाब देखे »
नमाज़ इस्लाम की सबसे ज़रूरी इबादत है, और इसमें क़ुरान की एक ख़ास सूरह पढ़ने का हुक्म है। इस सूरह के बिना नमाज़ मुकम्मल नहीं
सूरह फ़ातिहा की नमाज़ में क्या अहमियत है? जवाब देखे »
हज और ईद-उल-अज़हा के दिनों में हर दिन की अपनी खास अहमियत होती है। 10 ज़िल-हिज्जा का दिन, जिसे यौम-ए-नहर कहा जाता है, सबसे अहम
यौम-ए-नहर कौन से दिन को कहते हैं? जवाब देखे »
इस्लाम के पाँच सबसे ज़रूरी फ़र्ज़ अमल में एक ऐसी इबादत है जो दौलतमंद लोगों को अपने माल का एक हिस्सा ग़रीबों और ज़रूरतमंदों को
इस्लाम का वो कौन सा हुक्म है जिसमें मालदार शख़्स अपने माल से ग़रीबों की मदद करता है? जवाब देखे »
इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक है रोज़ा रखना। यह एक ऐसी इबादत है जिसे हर मुसलमान, जो सेहतमंद हो, एक ख़ास महीने में
इस्लामी कैलेंडर का वो कौन सा महीना है जिसमें मुसलमान रोज़े रखते हैं? जवाब देखे »
इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक ज़कात है, जिसे हर साहिब-ए-निसाब (जिसके पास ज़रूरी माल हो) मुसलमान पर फ़र्ज़ किया गया है। लेकिन, क्या
इस्लाम में ज़कात का असल मक़सद क्या है? जवाब देखे »
रमज़ान का महीना अपनी बरकतों और रहमतों के लिए जाना जाता है, लेकिन इस पाक महीने में एक ऐसी रात है जिसकी अहमियत हजारों महीनों
रमज़ान के महीने की वह बरकत वाली रात कौन-सी है जब कुरआन नाज़िल हुआ? जवाब देखे »
क़ुरान-ए-मजीद इंसान को नेकियों के लिए तरग़ीब दिलाने के लिए कई जगह बेहद खूबसूरत मिसालें देता है। उनमें से एक मिसाल है – एक दाने से
ज़कात इस्लाम का एक अहम फ़र्ज़ है और इसकी अदायगी का सही तरीका जानना हर मुसलमान के लिए ज़रूरी है। अक्सर घरों में यह सवाल
क्या बीवी शौहर को ज़कात दे सकती है? जवाब देखे »
रमज़ान का महीना बरकतों और रहमतों से भरा हुआ है। लेकिन रोज़े का असल मक़सद सिर्फ भूखे-प्यासे रहना या इफ़्तार की दावतें करना नहीं है,
रोज़े का असल मक़सद क्या है? जवाब देखे »
इस्लाम में रोज़ा एक इबादत है, लेकिन इसका मक़सद और निशाना साफ़ तौर पर अल्लाह तआला की रज़ा हासिल करना है। रोज़ा दिखावे या रस्म
रोज़ा किसके लिए रखा जाता है? जवाब देखे »
इबादत हमेशा अल्लाह की रजा के लिए होनी चाहिए, न कि लोगों की तारीफ़ पाने के लिए। लेकिन कुछ काम ऐसे हैं जो दिखावे (रीया) के
इनमें से कौन सा अमल रीया यानी शिर्क-ए-असगर है? जवाब देखे »
क़यामत का दिन वह दिन है जब हर इंसान को अपने आमाल का हिसाब देना होगा। उस दिन इंसान की छोटी-बड़ी सब ज़िम्मेदारियाँ खुलकर सामने
क़यामत के दिन सबसे पहले जो मामला हाज़िर किया जाएगा वो किन का होगा? जवाब देखे »
हर नेक अमल का इंसान को दुनिया और आख़िरत में बड़ा इनाम मिलता है। लेकिन कुछ ख़ास अमल ऐसे हैं जिनकी फ़ज़ीलत इतनी अज़ीम है
क़ुरान-ए-करीम अल्लाह की किताब है जिसमें हर आयत इंसानों के लिए रहनुमाई और सबक़ है। कुछ सूरहों में आयात का बार-बार दोहराया जाना हमें गहरी
क़ुरान-ए-करीम में वो कौन सी सूरह है जिसमें एक ही आयत-ए-करीमा 31 बार आई है? जवाब देखे »
क़ुरान को याद करना बहुत बड़ा शरफ़ है, लेकिन इसे संभालकर रखना और उसकी हिफ़ाज़त करना उससे भी ज़्यादा अहम है। नबी-ए-करीम ﷺ ने हाफ़िज़-ए-क़ुरान
क्या आप जानते हैं कि अल्लाह तआला हर रात अपने बंदों से ख़ास अंदाज़ में रहमत और मग़फिरत की पुकार करता है? ये कोई एक
शब-ए-क़द्र (लैलतुल क़द्र) इस्लाम की सबसे मुबारक रातों में से एक है। यह वह रात है जिसमें क़ुरआन-ए-करीम का नुज़ूल हुआ और जिसमें बंदे की
शब-ए-क़द्र को क़ुरआन में किस से बेहतर कहा गया है? जवाब देखे »
ज़कात इस्लाम का एक अहम स्तंभ है जो समाज में बराबरी और रहमत का कारण बनता है। लेकिन जो लोग ज़कात अदा नहीं करते, उनके
क़यामत के दिन गंजे साँप का तौक़ किस शख़्स को पहनाया जाएगा? जवाब देखे »
इस्लाम ने औरतों को इबादत और नेकियों में हिस्सा लेने से नहीं रोका, बल्कि उन्हें भी अल्लाह की रहमत के मौकों पर शामिल होने की
रसोअल्लाह (ﷺ) ने औरतों के ईदगाह जाने के बारे में क्या फरमाया है? जवाब देखे »
इस्लाम में नमाज़ ईमान की पहचान और बंदे के अल्लाह से सीधे रिश्ता रखने का ज़रिया है। लेकिन कुछ नमाज़ें ऐसी हैं जो मुनाफ़िक़ों (दिखावे
वो कौन सी दो नमाज़ें हैं जो मुनाफ़िक़ों पर ज़्यादा भारी हैं? जवाब देखे »
अल्लाह तआला ने इंसान को नेकियों की हिदायत दी है ताकि वो गुनाहों और फितनों से दूर रह सके। लेकिन क्या आप जानते हैं कि
वो कौन सी नेकी है जो इंसान को बेहयाई और बुराई से रोकती है? जवाब देखे »