24 जुलाई 2026

  • इस्लाम में नमाज़ (सलात) एक बहुत अहम इबादत है। यह सिर्फ़ अल्लाह से राब्ता (संबंध) का ज़रिया नहीं, बल्कि बंदे की ग़लतियों की तर्बियत (सुधार) का भी सबक देती है।
    नमाज़ के दौरान अगर किसी इंसान से भूल या गलती हो जाए — चाहे वह कोई रुक्न (जैसे रुकू या सज्दा) छूट जाए या कोई काम ज़्यादा कर लिया जाए — तो इस गलती की तसहीह (सुधार) के लिए जो सज्दा किया जाता है, उसे “सज्दा-ए-सहव

     कहा जाता है।

    सवाल: कुरआन मजीद में कितने सज्दा-ए-सहव हैं?

    • A. 14
    • B. 7
    • C. 3
    • D. इनमें से कोई नहीं

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अस्सलामु अलैकुम! islamicsawaljawab.in में आपका इस्तेक़बाल है। अल्हम्दुलिल्लाह! हमारा मक़सद – अवाम तक कुरआन, हदीस और इस्लामी तालीमात को सवाल-जवाब के आसान अंदाज़ में हिन्दी ज़ुबान में आम किया जाए।

हमारी यह कोशिश है कि सही इल्म हर किसी तक पहुँचे — चाहे मुस्लिम हो या ग़ैर-मुस्लिम! ताकि हर इंसान अपने रब के पैग़ाम को आसानी से समझ सके और अपनी दुनिया व आख़िरत सँवार सके।

🤲 आपकी दुआओं के तलबगार। जज़ाकुमुल्लाहु ख़ैरन कसीरा। आपका दिन भाई – मोहम्मद सलीम