25 मई 2026

  • इस्लाम हमें हर हाल में अल्लाह को याद करने की तालीम देता है, चाहे वह खुशी का वक़्त हो या ग़म का। जब भी किसी मोमिन पर कोई मुसीबत आती है, तो उसे एक ख़ास दुआ पढ़ने का हुक्म है जो सब्र और अल्लाह पर भरोसे को ज़ाहिर करती है। क्या आप जानते हैं वो दुआ क्या है और कब पढ़ी जाती है?

    सवाल: ‘इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन’ मोमिन यह दुआ कब पढ़ता है?

    • A. मुसीबत की घड़ी में
    • B. घर में दाख़िल होने पर
    • C. किसी के इंतकाल पर
    • D. खाना खाने से पहले

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अस्सलामु अलैकुम! islamicsawaljawab.in में आपका इस्तेक़बाल है। अल्हम्दुलिल्लाह! हमारा मक़सद – अवाम तक कुरआन, हदीस और इस्लामी तालीमात को सवाल-जवाब के आसान अंदाज़ में हिन्दी ज़ुबान में आम किया जाए।

हमारी यह कोशिश है कि सही इल्म हर किसी तक पहुँचे — चाहे मुस्लिम हो या ग़ैर-मुस्लिम! ताकि हर इंसान अपने रब के पैग़ाम को आसानी से समझ सके और अपनी दुनिया व आख़िरत सँवार सके।

🤲 आपकी दुआओं के तलबगार। जज़ाकुमुल्लाहु ख़ैरन कसीरा। आपका दिन भाई – मोहम्मद सलीम