अपने बच्चों को बोली सिखाने का आग़ाज़ किस बात से करें?

बच्चों की परवरिश सिर्फ़ खाना-पहनाना नहीं बल्कि उनके दिल और ज़ुबान को भी ईमान से जोड़ना है। जब बच्चा बोलना शुरू करता है तो उसके पहले लफ़्ज़ क्या होने चाहिए? इस सवाल का जवाब हमें हदीस-ए-मुबारक़ से मिलता है।

सवाल: अपने बच्चों को बोली सिखाने का आग़ाज़ किस बात से करें?

  • A. कलिमा-ए-तय्यिबा
  • B. वालिदैन की पहचान
  • C. मज़हब की पहचान
  • D. सही जवाब का इंतज़ार

सही जवाब है: ऑप्शन A , कलिमा-ए-तय्यिबा

तफ़सील (विवरण):

दलील (हदीस से सबूत)

📕 हदीस: रसूलुल्लाह ﷺ फ़रमाते हैं:

“कलिमा-ए-तय्यिबा, ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ से अपने बच्चे को बोली सिखाने का आग़ाज़ करो।”

📕 बैयहक़ी शरीफ़


नसीहत

यह हदीस हमें बताती है कि बच्चों की परवरिश का सबसे पहला हक़ यह है कि उनकी ज़ुबान से अल्लाह की तौहीद का इज़हार हो। अगर शुरुआत ही ईमान और तौहीद से होगी तो पूरी ज़िंदगी उसी राह पर गुज़रेगी।

वा आख़िरु दावाना अनिलहम्दुलिल्लाहि रब्बिल आलमीन

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