इनमें से कौन सा अमल रीया यानी शिर्क-ए-असगर है?

इबादत हमेशा अल्लाह की रजा  के लिए होनी चाहिए, न कि लोगों की तारीफ़ पाने के लिए। लेकिन कुछ काम ऐसे हैं जो दिखावे (रीया) के कारण शिर्क-ए-असगर में शामिल हो जाते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि कौन सा अमल इस श्रेणी में आता है।

सवाल: इनमें से कौन सा अमल रीया यानी शिर्क-ए-असगर है?

  • A. अच्छे कपड़े पहनना
  • B. अच्छा खाना खाना
  • C. हाजी का लेकब लगाना
  • D. सही जवाब का इंतजार

सही जवाब है: ऑप्शन C , हाजी का लेकब लगाना

तफ़सील (विवरण):

दलील

  • हज एक खास इबादत है, जिसे बंदा सिर्फ़ अपने रब की रजा  के लिए करता है।
  • यदि कोई इस नियत से हज करे कि लोग उसे हाजी साहब के नाम से पहचानें, तो यह दिखावा यानी रीया है।
  • रसूल अल्लाह ﷺ ने रीया के बारे में फरमाया:

“रीया का अदना भी शिर्क है।”
📕 इस्लामी अख़लाक़-ओ-आदाब, हदीस #7

एक और हदीस में फरमाया:

“(ऐ ईमानवालो) तुम्हारे बारे में जिस चीज़ से मैं डरता हूँ वह शिर्क-ए-असगर है।”
साहाबा ने पूछा: “या रसूल अल्लाह! यह शिर्क-ए-असगर क्या चीज़ है?”
आप ﷺ ने फरमाया: रीया! यानी दिखावे के लिए काम करना।
📕 अहमद


व्याख्या

  • किसी भी काम को दिखावे या तारीफ़ की उम्मीद में करना, जबकि वह काम सिर्फ़ अल्लाह की रजा  के लिए होना चाहिए, रीया कहलाता है।
  • रीया हज, नमाज़, रोज़ा और ज़कात में भी हो सकता है।
  • रसूल अल्लाह ﷺ ने हज के लिए दुआ की:

“अल्लाहुम्मा हज्जतन ला रीया फिहा व ला सुम’अ ।”
(हे अल्लाह! हमें ऐसा हज अता फरमा जो दिखावे और तारीफ़ से पाक हो।)


नसीहत

  • हमेशा अपने अमाल को खालिस रखो, सिर्फ़ अल्लाह की रजा  के लिए।
  • रीया के फितने से बचो और अपनी इबादत को साफ़ और सच्चा बनाओ।
  • अल्लाह से दुआ करें कि हमारी सभी इबादतें रीया से पाक रहें और हमें सही मार्गदर्शन दें।

♥ इनशाअल्लाह अल-अज़ीज़!

Leave a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *