ईद-उल-अज़हा की सबसे अहम इबादतों में से एक है क़ुरबानी। अक्सर लोग यह सवाल करते हैं कि आखिर क़ुरबानी कितने दिन तक की जा सकती है?
सवाल: क़ुरबानी कितने दिन तक कर सकते हैं?
- A. 4 दिन
- B. 7 दिन
- C. 10 दिन
- D. सही जवाब का इंतज़ार
सही जवाब है: ऑप्शन A , 4 दिन
तफ़सील (विवरण):
📜 दलील
क़ुरबानी ईद की नमाज़ के बाद से लेकर 13 ज़िल-हिज्जा के मग़रिब का सूरज डूबने तक यानी 4 दिन तक की जा सकती है।
हदीस से सबूत:
बराअ बिन आज़िब (र.अ.) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
“पूरा अरफ़ात वक़ूफ़ की जगह है और उरना से हटकर वक़ूफ़ करो। पूरा मुज़दलिफ़ा वक़ूफ़ की जगह है और वादीए मुहस्सिर से हटकर वक़ूफ़ करो। और मिना का हर रास्ता क़ुरबानी की जगह है और तश्रीक के तमाम दिन ज़बह करने के दिन हैं।”
📕 सहीह अल-जामिअ: 4537
वज़ाहत:
- ईद की नमाज़ से पहले की गई क़ुरबानी सही नहीं है।
- ईद की नमाज़ के बाद से लेकर 11, 12 और 13 ज़िल-हिज्जा (जिन्हें अय्याम-ए-तश्रीक कहा जाता है) तक क़ुरबानी का वक़्त होता है।
🕌 निष्कर्ष
क़ुरबानी का वक़्त चार दिन है – ईद-उल-अज़हा की नमाज़ के बाद से लेकर 13 ज़िल-हिज्जा की मग़रिब तक। इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि इन दिनों में अपनी क़ुरबानी अदा कर ले।
