इस्लाम में अज़कार (अल्लाह की याद) की बहुत अहमियत है। हर कलिमा का एक ख़ास मकाम और फज़ीलत है। हदीसों में कुछ अज़कार को ख़ास नाम दिए गए हैं, जैसे कि कलमा-ए-शुक्र। आइए जानते हैं कि कौन सा ज़िक्र कलमा-ए-शुक्र कहलाता है।
सवाल: इनमें से कौन से अज़कार को कलमा-ए-शुक्र कहा गया है?
- A. सुब्हानअल्लाह
- B. अलहमदुलिल्लाह
- C. हुआल्लाहु अहद
- D. अल्लाहु अकबर
सही जवाब है: ऑप्शन B , अलहमदुलिल्लाह
तफ़सील (विवरण):
📜 दलील
۞ मफ़हूम-ए-हदीस: अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया:
“इब्ने उमर (रज़ि अल्लाहु अन्हु) से रिवायत है –
- सुब्हानअल्लाह ‘सलातुल-ख़लाइक़’ (मख़लूक़ की इबादत) है।
- अलहमदुलिल्लाह कलमा-ए-शुक्र है।
- ला इलाहा इल्लल्लाह कलमा-ए-इख़लास है।
- और अल्लाहु अकबर ज़मीन और आसमान के दरमियान को भर देता है।”
📕 मिश्कातुल मसाबीह: 2322 – सहीह
🕌 निष्कर्ष
इस हदीस से मालूम होता है कि “अलहमदुलिल्लाह” असली कलमा-ए-शुक्र है, क्योंकि यह सीधे तौर पर अल्लाह तआला का शुक्र अदा करने का सबसे बेहतरीन तरीका है। मोमिन की ज़िंदगी में हर नेमत पर यही कलिमा ज़्यादा से ज़्यादा पढ़ना चाहिए।
