रोज़ा किसके लिए रखा जाता है?

इस्लाम में रोज़ा एक इबादत है, लेकिन इसका मक़सद और निशाना साफ़ तौर पर अल्लाह तआला की रज़ा हासिल करना है। रोज़ा दिखावे या रस्म के लिए नहीं बल्कि ख़ालिस अल्लाह के लिए रखा जाता है।

सवाल: रोज़ा किसके लिए रखा जाता है?

  • A. अल्लाह के लिए
  • B. रसूलअल्लाह ﷺ के लिए
  • C. लोगों को दिखाने के लिए
  • D. सही जवाब का इंतज़ार

सही जवाब है: ऑप्शन A , अल्लाह के लिए

दलील (क़ुरआन और हदीस से)

📖 क़ुरआन
“कह दो, बेशक मेरी नमाज़ और मेरी क़ुर्बानी और मेरा जीना और मेरा मरना अल्लाह ही के लिए है, जो सारे जहान का पालने वाला है।”
सूरह अल-अनआम 6:162

📕 हदीस-ए-क़ुदसी
रसूलअल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
“अल्लाह तआला फ़रमाता है: बंदा अपना खाना, पीना और अपनी ख़्वाहिश मेरे लिए छोड़ता है। रोज़ा मेरे लिए है और मैं ही इसका बदला दूँगा।”
(सहीह बुख़ारी, जिल्द 3, हदीस 1894)


नसीहत

रोज़ा अल्लाह के लिए है। जो लोग इसे दिखावे या गैर-अल्लाह की नीयत से रखते हैं, उनके लिए इससे कोई फ़ायदा नहीं बल्कि नुक़सान है। अल्लाह तआला हम सबको अपनी इबादतों को सिर्फ उसी के लिए करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए।

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