इन में से कौन सा अमल कुफ़्र है?

इस्लाम हमें इंसाफ़, शुक्रगुज़ारी और हक़दारी सिखाता है। लेकिन कुछ ऐसे अमल भी हैं जो इंसान को अल्लाह के ग़ज़ब के क़रीब कर देते हैं। एक हदीस में रसूलुल्लाह ﷺ ने औरतों के एक अमल को कुफ़्र क़रार दिया है। आइए जानते हैं वह अमल क्या है।

सवाल: इन में से कौन सा अमल कुफ़्र है?

  • A. शौहर की नाशुक्री करना
  • B. शौहर का नाम लेना
  • C. शौहर को मेहर लौटा देना
  • D. सही जवाब का इंतज़ार

सही जवाब है: ऑप्शन A , शौहर की नाशुक्री करना

तफ़सील (विवरण):

दलील (हदीस से सबूत)

📕 हदीस: अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास (रज़ि.अ) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया:

“मुझे दोज़ख दिखाई गई, मैंने वहाँ औरतों को ज़्यादा पाया, वजह ये है कि वह कुफ़्र करती हैं।”

सहाबा ने अर्ज़ किया: “क्या वह अल्लाह के साथ कुफ़्र (शिर्क) करती हैं?”

रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: “नहीं! वह शौहर की नाशुक्री करती हैं। यह एक तरह का कुफ़्र है और एहसान नहीं मानतीं। अगर तुम किसी औरत से उम्र भर एहसान और नेकी का सलूक करो, लेकिन एक बात भी ख़िलाफ़-ए-तबीयत हो जाए, तो झट से कह देती है – ‘मैंने तुमसे कभी आराम और सुकून नहीं पाया।’”

📕 बुख़ारी शरीफ़, जिल्द 1, बाब 21, हदीस-28, सफ़ा 109


नसीहत

इस हदीस से हमें सबक मिलता है कि इंसान को हमेशा शुक्रगुज़ार रहना चाहिए, ख़ास तौर पर पति-पत्नी के रिश्ते में। नाशुक्री रिश्तों को कमज़ोर करती है और अल्लाह की नाराज़गी का सबब बनती है।

वा आख़िरु दावाना अनिलहम्दुलिल्लाहि रब्बिल आलमीन

Leave a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *