रोज़े के दौरान मेडिकल ज़रूरतें कभी-कभी उलझन पैदा कर देती हैं—ख़ासकर इंजेक्शन, दवाई या इलाज के मामले में। एक आम सवाल यह है कि बेहोशी देने वाला इंजेक्शन लेने से रोज़ा टूटता है या नहीं? आइए इसका सही जवाब और दलील जानते हैं।
सवाल: रोज़ेदार अगर एनेस्थेटिक इंजेक्शन (बेहोश करने वाला इंजेक्शन) ले तो क्या होगा?
- A. रोज़ा टूट जाता है
- B. रोज़ा नहीं टूटेगा
- C. रोज़ा टूटेगा लेकिन कफ़्फ़ारा नहीं होगा
- D. रोज़ा टूटेगा और कफ़्फ़ारा भी होगा
सही जवाब है: ऑप्शन B , रोज़ा नहीं टूटेगा
तफ़सील (विवरण):
इस्लामी फ़िक्ह (धार्मिक कानून) के अनुसार, बेहोशी का इंजेक्शन शरीर को पोषण नहीं पहुंचाता, बल्कि केवल इलाज या ऑपरेशन के लिए बेहोशी देता है।
इसलिए ऐसे इंजेक्शन का असर रोज़े पर नहीं पड़ता।
इस्लामी फ़िक्ह अकादमी का फैसला है कि:
“बेहोशी देने वाले इंजेक्शन से रोज़ा नहीं टूटता। अगर मजबूरी की वजह से लेना पड़े तो इसकी अनुमति है। इस मुद्दे पर अधिकतर उलेमा एकमत हैं।”
(फ़ैसला: इस्लामिक फ़िक्ह अकादमी, प्रस्ताव संख्या 52, सवाल 12)
🕌 निष्कर्ष
यदि कोई रोज़ेदार इलाज की ज़रूरत से एनेस्थेटिक इंजेक्शन लेता है, तो उसका रोज़ा बिल्कुल नहीं टूटता।
मजबूरी की स्थिति में शरियत ने आसानी रखी है।
