रमज़ान के महीने में एक ऐसी रात है जिसे “हज़ार महीनों से बेहतर” कहा गया है। यह रात बहुत ही मुबारक है क्योंकि इसी रात को अल्लाह ने फ़रिश्तों के साथ ख़ास रहमतें और बरकतें नाज़िल फ़रमाईं। आइए जानते हैं कि यह खास रात रमज़ान के किस हिस्से में आती है।
सवाल: शब-ए-कद्र की मुबारक रात रमज़ान के कौनसे अशरे में आती है?
- A. पहला अशरा
- B. दूसरा अशरा
- C. तीसरा अशरा
- D. इल्म हासिल करेंगे
सही जवाब है: ऑप्शन C , तीसरा अशरा
तफ़सील (विवरण):
सही जवाब की दलील हदीस में मौजूद है, जिसमें बताया गया है कि यह रात किस वक़्त तलाश करनी चाहिए।
हदीस: हज़रत आयशा (रज़ीअल्लाहु अन्हा) से रिवायत है कि, रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया: “शब-ए-कद्र को रमज़ान के आखिरी अशरे की ताक रातों (21, 23, 25, 27, 29) में तलाश करो।”
📚 सहीह अल-बुखारी 2017
यह हदीस बताती है कि हमें इस मुबारक रात को रमज़ान के आखिरी दस दिनों में ढूंढना चाहिए और ख़ास तौर पर ताक़ रातों में।



