Author name: Nashra Shaikh

नशरा शेख ummat-e-nabi.com की एक इस्लामिक कंटेंट राइटर हैं। उनका शौक़ कुरआन और हदीस से साबित इस्लामी सवाल-जवाब और ऐसे पोस्ट तैयार करना है जो उम्मत के लिए फ़ायदेमंद साबित हों। उनका मक़सद वाज़ेह और सक़ारात्मक अंदाज़ में इल्म को आम करना है।

कौन सा ऐसा अमल है जो अल्लाह के इतने क़रीब कर देता है कि अल्लाह बंदे की सुनने, देखने, पकड़ने और चलने में उसकी मदद करता है?

“नफ़्ल इबादतें इंसान को अल्लाह के इतना क़रीब कर देती हैं कि अल्लाह तआला उसकी सुनने, देखने और चलने में रहनुमाई फ़रमाता है। जानिए कौन […]

कौन सा ऐसा अमल है जो अल्लाह के इतने क़रीब कर देता है कि अल्लाह बंदे की सुनने, देखने, पकड़ने और चलने में उसकी मदद करता है? जवाब देखे »

मरहूम (दुनिया से चले गए) रिश्तेदार की तरफ से कौन-कौन से अमल किए जा सकते हैं?

यह सवाल अक्सर पूछा जाता है कि हम अपने मरहूम रिश्तेदारों की तरफ से कौन-से नेक अमल कर सकते हैं जिनका सवाब उन्हें पहुँचे?हदीस से इसका

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वह क्या है जो किसी को माफ़ करने पर बढ़ा दिया जाता है?

किसी को माफ़ करना कभी आसान नहीं होता, लेकिन इस्लाम सिखाता है कि माफी देने वाला इंसान अल्लाह के यहाँ बहुत बुलंद दर्जा पाता है।

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रसूलअल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: “मैं शैतान को वहाँ घुसते देखता हूँ जैसे बकरी का बच्चा घुस जाता है।” यह किस स्थान के बारे में फ़रमाया गया?

नमाज़ सिर्फ़ सज्दा और रुकू का नाम नहीं, बल्कि एकता, अनुशासन और दिलों को जोड़ने का तरीका है। लेकिन नमाज़ की सफ़ में छोड़ी गई

रसूलअल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: “मैं शैतान को वहाँ घुसते देखता हूँ जैसे बकरी का बच्चा घुस जाता है।” यह किस स्थान के बारे में फ़रमाया गया? जवाब देखे »

तकलीफ़ों से तंग आकर मौत की तमन्ना करना कैसा है?

कभी-कभी इंसान ज़िंदगी की तकलीफ़ों से इतना टूट जाता है कि उसे मौत आसान लगने लगती है। लेकिन इस्लाम इंसान को मायूसी में नहीं गिरने

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कौन-सी उम्मत 70 उम्मतों को मुकम्मल करने वाली है?

इस्लाम की उम्मत को अल्लाह ने बेइंतहा फ़ज़ीलतें दी हैं। कई हदीसों में बताया गया है कि उम्मते-मुहम्मद ﷺ का दर्जा पिछली तमाम उम्मतों से

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वो कौनसे नबी की क़ौम के लोग थे जिनको अल्लाह सुब्हानहु ने अज़ाब नाज़िल करके मौत दे दी और फिर से इनको ज़िंदा कर दिया?

क्या आपने कभी सोचा है कि मौत के बाद ज़िंदगी का मज़ाक उड़ाने वालों को अल्लाह ने कैसे जवाब दिया? क़ुरान में एक ऐसा वाक़या

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फरिश्ते जिब्रील (अलैहिस्सलाम) एक मर्तबा एक रेशमी कपड़े में एक तस्वीर लेकर नबी ﷺ के पास आए और फरमाया कि ये आपकी दुनिया और आखिरत में बीवी है, उनका नाम क्या है?

पैगंबर मुहम्मद ﷺ का पवित्र जीवन कई अद्भुत घटनाओं और चमत्कारों से भरा है। उनके नबी होने के दावे को पुष्ट करने के लिए अल्लाह

फरिश्ते जिब्रील (अलैहिस्सलाम) एक मर्तबा एक रेशमी कपड़े में एक तस्वीर लेकर नबी ﷺ के पास आए और फरमाया कि ये आपकी दुनिया और आखिरत में बीवी है, उनका नाम क्या है? जवाब देखे »

वो कौनसी दो चमकती हुई सूरहें हैं जो कयामत के दिन उसके पढ़ने वालों के साथ इस तरह आएँगी जैसे दो बादल या दो साये हों?

कुरआन न सिर्फ हमारी दुनिया की जीवन-रेखा है, बल्कि आखिरत में भी यह हमारा सबसे बड़ा सहारा और सिफारिशी बनेगा। पैगंबर मुहम्मद ﷺ ने कुछ

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रसूलअल्लाह ﷺ ने फरमाया “ईमान सिमट कर ………….. में इस तरह आ जाएगा जैसे साँप सिमट कर बिल में आ जाता है”

कयामत के नज़दीक आने से पहले दुनिया में बड़े बड़े फितने और अफरा-तफरी फैलेगी। ऐसे में सच्चा ईमान दुर्लभ होता जाएगा। लेकिन क्या आप जानते

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जो मुसलमान खाने-पीने की चीज़ों को ज़खीरा बनाकर रखता है, अल्लाह उस पर कौनसा अज़ाब नाज़िल करता है?

इस्लाम ने हमेशा इंसानियत और भाईचारे को बढ़ावा दिया है। यही कारण है कि यह समाज में फैलने वाली हर बुराई पर सख्त रुख रखता

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मेराज की रात रसूलअल्लाह (ﷺ) की मुलाकात हारून (अलैहिस्सलाम) से कौनसे आसमान पर हुई?

मेराज का वाक़िया इस्लामी इतिहास का एक अनूठा और चमत्कारिक पल है, जब रसूलअल्लाह ﷺ को आसमानों की सैर कराई गई। इस यात्रा में आपने

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वह कौन सी दुआ है जो लफ़्ज़ “सुब्हान” से शुरू होती है?

हमारा दिन कई छोटे-बड़े कामों से भरा होता है, और इस्लाम ने हमारे हर छोटे काम को इबादत बनाने का तरीका बताया है। इसमें यात्रा

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वो क्या है जो इंसानों के दिल से इस तरह निकल जाता है जैसे कोई ऊँट भाग जाता है?

हमारे दिल एक बहुत ही नाजुक और याद रखने-भूलने वाले अंग हैं। जिस तरह एक बहुमूल्य चीज को सहेजकर न रखा जाए तो वह खो

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हदीस के मुताबिक ज़रूरत पड़ने पर इंसान को खाना और पानी कितना पेट भर खाना और पीना चाहिए?

इस्लाम एक संतुलित और सेहतमंद जीवनशैली का मार्गदर्शक है। यह न सिर्फ रूहानी बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य का भी पूरा ख्याल रखता है। आज के दौर

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दो आदमियों की नमाज़ के उनमें एक इमामत करवाए तो अल्लाह सुब्हानहु के नज़दीक तन्हा पढ़ी जाने वाली कितनी नमाज़ों से बेहतर है?

हम अक्सर नमाज़ अकेले पढ़ लेते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर सिर्फ एक और व्यक्ति को साथ लेकर जमात बना ली जाए,

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इनमें से वो कौन लोग हैं जिनको बेशुमार अज्र दिया जाएगा, जिसका जिक्र सूरह ज़ुमर में है?

इंसानी जिंदगी में मुश्किलें और परेशानियाँ आती रहती हैं। ऐसे में इंसान का इम्तिहान होता है कि वह कैसे व्यवहार करता है। इस्लाम में हर

इनमें से वो कौन लोग हैं जिनको बेशुमार अज्र दिया जाएगा, जिसका जिक्र सूरह ज़ुमर में है? जवाब देखे »

किन दो चीजों की मोहब्बत में बूढ़े इंसान का दिल हमेशा जवान रहता है?

उम्र बढ़ने के साथ इंसान का शरीर बूढ़ा होने लगता है, लेकिन क्या दिल भी बूढ़ा हो जाता है? पैगंबर मुहम्मद ﷺ ने इंसानी फितरत

किन दो चीजों की मोहब्बत में बूढ़े इंसान का दिल हमेशा जवान रहता है? जवाब देखे »

हिजरी कैलेंडर का कौनसा महीना रमज़ान कहलाता है?

हिजरी कैलेंडर, या इस्लामी कैलेंडर, मुसलमानों के धार्मिक जीवन का केंद्रबिंदु है। इसके हर महीने का अपना एक अलग महत्व और फज़ीलत है। जब भी

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जब एक मुसलमान किसी दूसरे मुसलमान से जुदा हो तो उसको क्या कहना चाहिए?

हम अक्सर मिलते वक्त “अस्सलामु अलैकुम” कहते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस्लाम में विदा होते वक्त भी सलाम देना एक सुन्नत और

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वो कौनसी सूरह है जिसके लिए रसूलअल्लाह ﷺ ने फरमाया कि जादूगर उस (सूरह को पढ़ने वाले) का मुकाबला नहीं कर सकता?

कुरआन न सिर्फ हमारे लिए हिदायत है, बल्कि यह हर तरह के बुरे प्रभाव और नुकसान से हमारी हिफाज़त का ज़रिया भी है। पैगंबर मुहम्मद

वो कौनसी सूरह है जिसके लिए रसूलअल्लाह ﷺ ने फरमाया कि जादूगर उस (सूरह को पढ़ने वाले) का मुकाबला नहीं कर सकता? जवाब देखे »

जहन्नुम में सबसे ज़्यादा कौन जाएंगे?

कयामत और आखिरत का दिन हर इंसान के लिए एक बड़ा इम्तिहान होगा। पैगंबर मुहम्मद ﷺ ने अपनी उम्मत को बार-बार इस दिन के लिए

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किस मुसलमान के तमाम गुनाह माफ कर दिए जाते हैं सिवाय कर्ज़ के?

इस्लाम में अल्लाह की राह में अपनी जान कुर्बान करने वाले शहीद का मुकाम बहुत ऊँचा है। शहादत एक ऐसी इबादत है जिसके बदले में

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वो कौनसा काम है जिसके लिए रसूलअल्लाह (ﷺ) ने फरमाया: जब तुम उसको करोगे तो आपस में मोहब्बत करने लग जाओगे?

इस्लाम एक पूर्ण जीवन प्रणाली है जो न सिर्फ इबादत बल्कि इंसानों के बीच रिश्तों को मजबूत करने का भी तरीका सिखाती है। कई बार

वो कौनसा काम है जिसके लिए रसूलअल्लाह (ﷺ) ने फरमाया: जब तुम उसको करोगे तो आपस में मोहब्बत करने लग जाओगे? जवाब देखे »

वो कौनसा गुनाह है जिसका कोई न कोई हिस्सा अल्लाह ने इंसान के लिए लिख दिया है?

इंसान की फितरत में अच्छाई और बुराई दोनों के बीज मौजूद हैं। इस्लाम हमें हर तरह के गुनाह से बचने की ताकीद करता है, लेकिन

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हर हफ्ते 2 दिन जन्नत के दरवाज़े खोले जाते हैं और उन सबकी मगफ़िरत हो जाती है जो शिर्क न करते हों और अपने भाई के खिलाफ़ कीना न रखते हों, वो 2 दिन कौनसे हैं?

हमारे हर हफ्ते में कुछ ऐसे दिन आते हैं जिनका इस्लाम में विशेष महत्व बताया गया है। इनमें से दो दिन ऐसे हैं जो हमें

हर हफ्ते 2 दिन जन्नत के दरवाज़े खोले जाते हैं और उन सबकी मगफ़िरत हो जाती है जो शिर्क न करते हों और अपने भाई के खिलाफ़ कीना न रखते हों, वो 2 दिन कौनसे हैं? जवाब देखे »

कौनसे अमल के लिए यह फरमाया कि जब तक तुम वो नहीं करोगे नेकी में कमाल हासिल नहीं कर सकते?

ईमान और नेकी एक ऐसा सफर है जिसमें इंसान लगातार अपने आप को बेहतर बनाने की कोशिश करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि

कौनसे अमल के लिए यह फरमाया कि जब तक तुम वो नहीं करोगे नेकी में कमाल हासिल नहीं कर सकते? जवाब देखे »

जो निकाह की ताक़त न रखता हो उसको क्या करना चाहिए?

शादी (निकाह) करना एक अज़ीम इबादत और सुन्नत है, जो इंसान को बहुत-सी बुराइयों से बचाती है। लेकिन क्या हो अगर कोई निकाह करने की

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कुरआन में नाज़िल होने वाली सबसे पहली आयत “इक़रा बिस्मि रब्बिकल्लज़ी ख़लक़” में ‘इक़रा’ का मतलब क्या है?

जब अल्लाह तआला का पहला वह्य जिब्रील अमीन के ज़रिए नबी-ए-आखिर ﷺ पर उतरा, तो उसकी पहली ही आयत ने इंसानियत को ज्ञान, विज्ञान और

कुरआन में नाज़िल होने वाली सबसे पहली आयत “इक़रा बिस्मि रब्बिकल्लज़ी ख़लक़” में ‘इक़रा’ का मतलब क्या है? जवाब देखे »