इस्लामी इतिहास में जहाँ सहाबा-ए-किराम ने अपनी जानें क़ुर्बान कीं, वहीं बहादुर सहाबिया ने भी अद्भुत सेवाएँ अंजाम दीं।
ग़ज़वा-ए-उहद में दो महान सहाबिया ने ऐसा काम किया जो आज भी ईमान को ताज़ा कर देता है।
सवाल: उहद की लड़ाई में वह कौन-सी दो सहाबिया थीं जो रसूल-अल्लाह ﷺ के साथ मैदान में मौजूद थीं?
- A. सफ़िया और अस्मा (रज़ि.)
- B. हफ़्सा और जुवैरिया (रज़ि.)
- C. ज़ैनब और आयशा (रज़ि.)
- D. आयशा और उम्मे सुलेम (रज़ि.)
सही जवाब है: ऑप्शन D , आयशा और उम्मे सुलेम (रज़ि.)
तफ़सील (विवरण):
दलील:
۞ बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम ۞
अनस बिन मालिक (रज़ि.) से रिवायत है:
“उहद की लड़ाई के समय आयशा बिन्त अबू बक्र (रज़ि.) और उम्मे सुलेम (रज़ि.) पानी के मशकीज़े उठाए हुए आती-जाती थीं और ज़ख्मी मुसलमानों को पानी पिलाती थीं।”
📖 सहीह बुख़ारी, जिल्द 4, हदीस 2880
निष्कर्ष:
इन दोनों सहाबिया की यह खिदमत साबित करती है कि इस्लाम की राह में मर्द और औरत—दोनों ने मिलकर बे-मिसाल जुरअत, हिम्मत और ईमानदारी का परिचय दिया।
उनका यह अमल आज भी हमें सीख देता है कि अल्लाह के रास्ते की हर सेवा क़ीमती और फलदार है।



