इंसान के दिल की ज़िन्दगी और मौत सिर्फ़ जिस्मानी मसला नहीं है, बल्कि रूहानी भी है। इस्लाम हमें ऐसे अ‘माल से बचने की हिदायत देता है, जो दिल को सख़्त और ग़ाफ़िल कर दें।
सवाल: इनमें से कौन-सा अमल दिल को मुर्दा बना देता है?
- A. ज़्यादा हँसना
- B. ज़्यादा खाना
- C. ज़्यादा माल
- D. सही जवाब का इंतज़ार
सही जवाब है: ऑप्शन A , ज़्यादा हँसना
तफ़सील (विवरण):
दलील (हदीस से सबूत)
📖 हदीस: रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया –
“ज़्यादा न हँसा करो, क्योंकि ज़्यादा हँसना दिल को मुर्दा बना देता है।”
📕 इब्न माजा, हदीस नं. 4193
वजहात और नसीहत
हर चीज़ का एक दायरा है। जब तक इंसान अपनी हद में रहता है, उसमें भलाई है। लेकिन अगर इंसान हद से आगे बढ़ जाए तो उसमें शर और नुक़सान रह जाता है।
इसी तरह ख़ुश होना और मुस्कुराना अच्छी चीज़ है, मगर हद से ज़्यादा हँसना इंसान के दिल को ग़फ़लत और कठोरता में डाल देता है।
👉 इंसान अगर दुनिया की खुशियों और हँसी-मज़ाक में इतना मशग़ूल हो जाए कि आख़िरत की फ़िक्र से ग़ाफ़िल हो जाए, तो यह उसकी तबाही का सबब बन सकता है।
ताअल्लुक़ आज की ज़िन्दगी से
आजकल सोशल मीडिया और दुनियावी मशग़ूलियत ने हमें हद से ज़्यादा हँसी-मज़ाक, कॉमेडी और मनोरंजन में उलझा दिया है। इस वजह से दिल की नर्मी और अल्लाह की याद कम हो रही है।
इसलिए हमें चाहिए कि:
- हँसें लेकिन हद में।
- दिल को ज़िन्दा रखने के लिए अल्लाह का ज़िक्र, क़ुरान की तिलावत और आख़िरत की फ़िक्र को अपना हिस्सा बनाएँ।



