हर इंसान अल्लाह की रहमत का मोहताज है। जब मुसीबतें, ज़ुल्म या परेशानियाँ बढ़ जाती हैं तो इंसान यही सोचता है कि अल्लाह हम पर रहम करे। लेकिन असल सवाल यह है कि अल्लाह की रहमत पाने का असली तरीका क्या है?
सवाल: अगर हम चाहते हैं कि अल्लाह हम पर रहम करे तो हमें क्या करना चाहिए?
- A. आबा-ओ-अज्दाद के दीन की पैरवी
- B. अपने इमामों की तक़लीद
- C. अल्लाह और रसूल की इताअत
- D. सही जवाब का इंतज़ार
सही जवाब है: ऑप्शन C , अल्लाह और रसूल की इताअत
तफ़सील (विवरण):
📖 दलील:
बेशक! अल्लाह हम पर तभी रहम करेगा जब हम अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की इताअत करेंगे।
अल्लाह तआला कुरआन में फरमाता है:
“इता-अत करो अल्लाह की और उसके रसूल की ताकि तुम पर रहम किया जाए।”
📖 [सूरह आल-इमरान 3:132]
⚡ वजाहत:
आज हम सब अल्लाह की रहमत के मोहताज हैं। उम्मत पर ज़ुल्मो-सितम हो रहा है और मुश्किलें बढ़ रही हैं।
अल्लाह की रहमत और मदद तभी नसीब होगी जब हम रसूलुल्लाह ﷺ के तरीक़े को अपनाएँगे और ख़ालिस सुन्नतों पर अमल करेंगे।
🌟 सीख:
- अल्लाह की रहमत पाने का रास्ता सिर्फ़ उसकी और उसके रसूल ﷺ की इताअत है।
- बड़ों, इमामों या मस्लकों की अंधी पैरवी से बचकर सीधी राह अपनाना ज़रूरी है।
- सुन्नत की पाबंदी ही असली कामयाबी और रहमत का ज़रिया है।
🤲 दुआ:
अल्लाह तआला हमें कहने-सुनने से ज़्यादा अमल की तौफ़ीक़ दे और हमें अपनी रहमत से नवाज़े। आमीन।
