क्या आप जानते हैं कि इस्लाम का धर्म कब पूरी तरह मुकम्मल हुआ? यह जानना हर मुसलमान के लिए जरूरी है ताकि हम अपने आस्था और अमल में सही राह पर चल सकें।
सवाल: दिन – ऐ – इस्लाम कब मुकम्मिल हुआ?
- A. रसूलअल्लाह (ﷺ) के दौर में
- B. चार इमामों के दौर में
- C. अभी तक हो रहा है
- D. सही जवाब का इंतजार
सही जवाब है: ऑप्शन A , रसूलअल्लाह (ﷺ) के दौर में
तफ़सील (विवरण):
दलील और तफ़सील:
दिन – ऐ – इस्लाम रसूलअल्लाह (ﷺ) के दौर में मुकम्मिल हुआ।
वज़ह:
۞ बिस्मिल्लाह-इर-रहमान-इर-रहीम ۞
हजतुल विदा के मौके पर रसूलअल्लाह (ﷺ) ने फरमाया:
“हे लोगों! शायद आने वाले साल या फिर कभी तुमसे यहाँ मुलाकात न हो सके। जो तुम में से गरीब हैं, उन्हें वही खिलाओ जो तुम खाते हो, वही पहनाओ जो तुम पहनते हो। सब को अल्लाह ही की तरफ लौटना है और वह तुमसे तुम्हारे कामों का हिसाब लेगा।”
रसूलअल्लाह (ﷺ) ने यह भी कहा कि हर मुसलमान दूसरे मुसलमान का भाई है और सभी मुसलमान आपस में भाई-भाई हैं। रंग, नस्ल और कबीले का कोई भेदभाव नहीं है और किसी के माल पर ज़रूरत से ज्यादा हक़ नहीं है।
फिर उन्होंने तक़मील-ए-दीं के हवाले से क़ुरान की आयत पढ़ी:
“आज के दिन हमने तुम्हारे लिए धर्म को मुकम्मल कर दिया और अपनी नेमतें पूरी कर दी और तुम्हारे लिए इस्लाम को पसंद कर लिया।”
📕 सूरह मैदा 5:3
इससे स्पष्ट होता है कि रसूलअल्लाह (ﷺ) के जरिए अल्लाह ने अपना दीन मुकम्मिल किया। अब इस मुकम्मिल दीन में कोई नया अकीदा शामिल नहीं हो सकता।
बिद्दत से सावधानी:
अगर कोई दीन में नया अकीदा या नया अमल शामिल कर दे, तो वह बिद्दत है। रसूलअल्लाह (ﷺ) ने फरमाया:
“व कुल्लु बिद्दतुन ज़लाला”
📕 अब्दू दावूद, तिर्मिज़ी
यानी दीन में हर नई चीज़ गुमराही और भटकाव का कारण बनती है।
सीख (सबाक़):
- शरीयत का सही ज्ञान हासिल करें।
- उस पर खुद अमल करें और दूसरों को भी अमल की दावत दें।
- हर नई चीज़ जो दीन में शामिल की जाए, उससे बचें।
♥ इन-शा-अल्लाह अल-अजीज़!
- अल्लाह हमें सिर्फ सुनने और कहने से अधिक अमल करने की तौफ़ीक़ दे।
- हमें रसूलअल्लाह (ﷺ) की पवित्र सन्नत का पालन करने वाला बनाए।
- जब तक हमें ज़िंदा रखे, इस्लाम और ईमान पर कायम रखे।
- हमारा अंत ईमान पर हो।
!!! वा आख़िरु दावाना अनिल्हम्दुलिल्लाहे रब्बिल आलमीन !!!



