दज्जाल का फ़ितना क़यामत की बड़ी अलामतों में से एक है और इससे बचना हर मुसलमान के लिए बेहद ज़रूरी है। अल्लाह के रसूल ﷺ ने हमें पहले ही बता दिया कि कौन-सी सूरह हमें इस बड़े इम्तिहान से बचा सकती है।
सवाल: वो कौन-सी सूरह है जो मुसलमानों को दज्जाल के फ़ितने से बचाने के लिए काफ़ी है?
- A. सूरह बक़रह [2]
- B. सूरह क़हफ़ [18]
- C. सूरह यासीन [36]
- D. सही जवाब का इंतज़ार
सही जवाब है: ऑप्शन B , सूरह क़हफ़ [18]
तफ़सील (विवरण):
📜 दलील (हदीस से)
हदीस:
अबू दरदा (रज़ि अल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि, अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया:
“जिसने सूरह क़हफ़ की पहली 10 आयतों को याद कर लिया, वो फ़ितना-ए-दज्जाल से महफ़ूज़ हो गया।”
📕 सहीह मुस्लिम 809a
🕌 नसीहत
- दज्जाल का फ़ितना बहुत बड़ा इम्तिहान है, लेकिन अल्लाह ने हमें इससे बचने का तरीका बताया है।
- सूरह क़हफ़ की आयतों को याद करना और उन पर अमल करना ईमान की हिफ़ाज़त का ज़रिया है।
- हमें चाहिए कि हम हफ़्ते में एक बार (ख़ासकर जुमे के दिन) सूरह क़हफ़ की तिलावत करें।
🚩 सबक
- सूरह क़हफ़ दज्जाल के फ़ितने से बचने का सबसे बड़ा सहारा है।
- हिफ़ाज़त सिर्फ़ पढ़ने में नहीं, बल्कि याद करने और समझने में है।
- हमें और हमारी औलाद को दज्जाल के फ़ितने से महफ़ूज़ रहने के लिए इस सूरह से वाबस्तगी बढ़ानी चाहिए।
🤲 दुआ
- अल्लाह तआला हमें सूरह क़हफ़ की तिलावत, हिफ़्ज़ और अमल की तौफ़ीक़ दे।
- हमें और हमारी आने वाली नस्लों को दज्जाल के फ़ितने और हर गुमराही से महफ़ूज़ रखे।
- ईमान पर ज़िंदा रखे और ईमान पर ही हमारा ख़ातिमा करे।
आमीन या रब्बल आलमीन 🌹



