क़ुरबानी इस्लाम में सबसे महत्वपूर्ण इबादतों में से एक है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि क़ुरबानी किसके लिए करनी चाहिए?
सवाल: क़ुरबानी किसके लिए करने का हुक्म आया है?
- A. अल्लाह के लिए
- B. नबियों के लिए
- C. वलीअल्लाह के लिए
- D. सही जवाब का इंतज़ार
सही जवाब है: ऑप्शन A , अल्लाह के लिए
तफ़सील (विवरण):
📜 दलील (क़ुरान से)
क़ुरान:
“अपने रब के लिए नमाज़ पढ़ो और क़ुरबानी करो।”
📕 सूरह कौसर 108:2
“आप (नबी ﷺ) फ़रमाइए कि बेशक मेरी नमाज़, मेरी क़ुरबानी, मेरा जीना और मेरा मरना यह सब ख़ालिस अल्लाह ही के लिए है, जो सारे जहां का मालिक है।”
📕 सूरह अल-अनाम, 6:162
🕌 सबक और तफ़सीर
- क़ुरबानी सिर्फ अल्लाह की रज़ा के लिए करनी चाहिए, न कि किसी इंसान या किसी संत के लिए।
- इससे हमारी इबादत में ख़ालिसीयत और ईमानदारी बनी रहती है।
- अगर हम इसे किसी और के लिए करें, तो इसका आध्यात्मिक फ़ायदा कम हो जाता है और यह रीया (दिखावा) की श्रेणी में आ सकता है।
🤲 दुआ
- ऐ अल्लाह! हमारी क़ुरबानी को केवल तेरी रज़ा के लिए क़बूल फ़रमा।
- हमारे दिल और इरादों को हमेशा नेक और पवित्र बनाए रख।
- हमें सच्ची नीयत और इबादत की तौफ़ीक अता फ़रमा।
आमीन 🌹



