एक जानवर कितने लोगों की तरफ़ से क़ुरबान किया जा सकता है?

ईद-उल-अज़हा पर हर मुसलमान यह सवाल ज़रूर सोचता है कि क्या एक जानवर पूरी फैमिली की तरफ़ से क़ुरबान किया जा सकता है? या फिर हर शख़्स को अलग-अलग क़ुरबानी करनी ज़रूरी है? आइए इस मसले का सही और हदीस से साबित जवाब जानते हैं।

सवाल: एक जानवर कितने लोगों की तरफ़ से क़ुरबान किया जा सकता है?

  • A. एक इंसान की तरफ़ से
  • B. शौहर और बीवी की तरफ़ से
  • C. पूरे घरवालों की तरफ़ से
  • D. जवाब का इंतज़ार

सही जवाब है: ऑप्शन C , पूरे घरवालों की तरफ़ से

तफ़सील (विवरण):

📜 दलील

क़ुरबानी का एक जानवर चाहे बकरा/बकरी ही क्यों न हो, वह एक घराने के सभी अफ़राद की तरफ़ से काफ़ी है।

घराने का मतलब:

  • वह पूरा परिवार जो साथ रहता हो।
  • क़ुरबानी करने वाला उनके खर्च का ज़िम्मेदार हो।
  • और वे सभी रिश्तेदार हों।

➡️ जिसका चूल्हा अलग है, उसे अलग क़ुरबानी करनी होगी।

हदीस से सबूत:
अता बिन यसार कहते हैं कि मैंने अबू अय्यूब अंसारी (रज़ि.) से पूछा:
रसूलुल्लाह ﷺ के ज़माने में क़ुरबानी कैसे होती थी?
तो उन्होंने कहा:
“एक आदमी अपनी और अपने घरवालों की तरफ़ से एक बकरी क़ुरबानी करता था। वह लोग खुद खाते थे और दूसरों को खिलाते थे। यहाँ तक कि लोग (कसरत-ए-क़ुरबानी पर) फ़ख़्र करने लगे और आज यह हाल है जो तुम देख रहे हो।”

📕 तिर्मिज़ी: 1505
✦ अल्लामा अल्बानी रहिमहुल्लाह ने इस हदीस को सहीह कहा है।


🕌 निष्कर्ष

  • एक जानवर पूरे घरवालों की तरफ़ से काफ़ी है।
  • अलग रहने वाले (अलग चूल्हा) लोग अपनी अलग क़ुरबानी करेंगे।
  • नबी ﷺ के दौर में यही आम अमल था।

🤲 दुआ

अल्लाह तआला हमें क़ुरबानी के सही अहकाम समझने, अमल करने और दूसरों तक पहुँचाने की तौफ़ीक़ अता फरमाए।

आमीन 🌹

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