इस्लाम में जनाज़े (मय्यत के निकलने) के आदाब बहुत अहमियत रखते हैं। जनाज़े को देखकर इंसान को मौत की याद आती है और आखिरत का एहसास होता है। इसी मौके पर रसूलअल्लाह ﷺ ने एक हिकमत भरी सुन्नत सिखाई — जब जनाज़ा गुज़रे, तो क्या करना चाहिए?
सवाल: रसूलअल्लाह (ﷺ) ने फरमाया, जब तुम लोग जनाज़ा देखो तो क्या करना चाहिए?
- A. खड़े हो जाया करो
- B. बैठ जाया करो
- C. चुप हो जाया करो
- D. उसके पीछे चले जाया करो
सही जवाब है: ऑप्शन A , खड़े हो जाया करो
तफ़सील (विवरण):
📜 दलील:
۞ बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम ۞
हज़रत मुआज़ बिन फदाला (रज़ि.) से रिवायत है:
“हमारे सामने से एक जनाज़ा गुज़रा तो रसूलअल्लाह ﷺ खड़े हो गए, और हम भी खड़े हो गए। हमने अर्ज़ किया: ‘या रसूलअल्लाह ﷺ, यह तो यहूदी का जनाज़ा था।’
आप ﷺ ने फरमाया:
‘जब तुम लोग जनाज़ा देखो तो खड़े हो जाया करो।’”
📕 सहीह बुखारी, हदीस 1311
💭 सीख:
इस हदीस से मालूम होता है कि हर जनाज़े के प्रति इज़्ज़त और एहतराम दिखाना सुन्नत है — चाहे वह मुसलमान का हो या ग़ैर-मुस्लिम का। यह इंसानियत और मौत के एहतराम की निशानी है।



