रमज़ान की मुबारक रातों में एक रात ऐसी होती है जो इंसान की पूरी ज़िंदगी बदल सकती है—शब-ए-क़द्र। बहुत से लोग पूछते हैं कि इस रात की इबादत का सवाब कितना होता है? आइए, सही जवाब और उसकी दलील जानते हैं।
सवाल: शब-ए-क़द्र में इबादत का सवाब कितना है?
- A. 1000 दिन
- B. 1000 हफ़्ते
- C. 1000 महीने
- D. 1000 साल
सही जवाब है: ऑप्शन C , 1000 महीने
तफ़सील (विवरण):
📖 दलील
अल्लाह तआला सूरह अल-क़द्र (97) में फ़रमाता है:
“शब-ए-क़द्र 1000 महीनों से बेहतर है।”
यानी इस एक रात की इबादत 83 साल से ज़्यादा की इबादत से भी बेहतर है।
अल्लाह तआला इस मुबारक रात में अपने बंदों पर रहमतों के ऐसे दरवाज़े खोलता है जो पूरी ज़िंदगी नहीं खुलते।
📕 मफ़हूम: सूरह अल-क़द्र, 97
🤲 दुआ
अल्लाह तआला हमें कहने से ज़्यादा अमल की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।


