पैगंबर मुहम्मद ﷺ ने अपनी उम्मत के लिए कई चीजों से सावधान किया है, लेकिन एक चेतावनी बहुत ही अनोखे अंदाज में दी है। आप ﷺ ने फरमाया कि आपको उम्मत के बारे में सबसे ज़्यादा डर एक चीज़ से है। जब सहाबा ने उस चीज़ के बारे में पूछा, तो आपने एक ऐसा जवाब दिया जो शायद हम सबकी आज की ज़िंदगी पर सीधा लागू होता है। आइए जानते हैं कि वो चीज़ क्या है।
सवाल: ज़मीन की बरकतें क्या हैं?
- A. बारिश का पानी
- B. दुनिया की चमक-दमक
- C. चाँद की रोशनी
- D. सूरज की रोशनी
सही जवाब है: ऑप्शन B , दुनिया की चमक-दमक
तफ़सील (विवरण):
दलील:
इस गहरी चेतावनी और समझ का विस्तार से वर्णन हज़रत अबू सईद खुदरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत एक सहीह हदीस में मिलता है। रसूलअल्लाह ﷺ ने फरमाया:
“मैं तुम्हारे मुताल्लिक सबसे ज़्यादा इससे खौफ़ खाता हूँ कि जब अल्लाह तआला ज़मीन की बरकतें तुम्हारे लिए निकाल देगा।”
पूछा गया: “ज़मीन की बरकतें क्या हैं?”
फरमाया: “दुनिया की चमक-दमक।”
इस पर एक सहाबी ने पूछा: “क्या भलाई से बुराई पैदा हो सकती है?” (यानी क्या दौलत से बुराई आ सकती है?) इस पर नबी करीम ﷺ ख़ामोश हो गए और हमने ख़्याल किया कि शायद आप पर वही नाज़िल हो रही है। इसके बाद आपने अपनी पेशानी को साफ़ किया और दरयाफ़्त फरमाया: “पूछने वाला कहाँ है?” पूछने वाले ने कहा: “हाज़िर हूँ।”
तब रसूलअल्लाह ﷺ ने फरमाया:
“भलाई से तो सिर्फ भलाई ही पैदा होती है, लेकिन ये माल सिरसब्ज़ और ख़ुशगवार (घास की तरह) है, और जो चीज़ भी रबी के मौसम में उगती हैं वो हिरस (लालच) के साथ खाने वालों को हलाक कर देती है या हलाकत के करीब पहुँचा देती हैं… और ये माल भी बहुत शीरीं (मीठा) है, जिसने उसे हक़ के साथ लिया और हक़ में खर्च किया तो वह बेहतरीन ज़रिया है, और जिसने उसे नाजायज़ तरीक़े से हासिल किया तो वह उस शख़्स जैसा है जो खाता है लेकिन आसूदा (तृप्त) नहीं होता।”
📖 सहीह बुखारी, हदीस 6427
संक्षेप में समझें:
- ज़मीन की बरकत: यहाँ ‘बरकत’ से मुराद दुनिया की चमक-दमक, सुख-सुविधाएँ और धन-दौलत है।
- खतरा: पैगंबर ﷺ को डर है कि जब अल्लाह ये सब चीजें आसानी से दे देगा, तो लोग लालच और दुनिया की मोह में फंसकर अपनी आखिरत भूल जाएँगे।
- तुलना: दौलत को बहार में उगने वाली हरी-भरी घास से तुलना की गई है, जो जानवरों को लालच में खाने पर मार देती है। उसी तरह, गैर-कानूनी या लालच से कमाई गई दौलत इंसान को आध्यात्मिक तौर पर बर्बाद कर सकती है।
- सही इस्तेमाल: अगर दौलत हलाल तरीके से कमाई जाए और अल्लाह के रास्ते में खर्च की जाए, तो यह बहुत बढ़िया चीज है और जन्नत का ज़रिया बन सकती है।



