इस्लाम के शुरुआती दौर में अबू जहल इस्लाम का सबसे बड़ा दुश्मन माना जाता था।
उसकी जिद, घमंड और नफ़रत ने उसे उस मुक़ाम तक पहुँचा दिया जहाँ आखिरकार अल्लाह ने उसे ज़लील कर के मार गिराया। आइए जानते हैं वो कौन-सा ग़ज़वा था जिसमें अबू जहल मारा गया।
सवाल: अबू जहल कौन-से ग़ज़वे में क़त्ल हुआ?
- A. ग़ज़वा-ए-उहद
- B. फ़तेह मक्का
- C. ग़ज़वा-ए-बद्र
- D. ग़ज़वा-ए-खंदक
सही जवाब है: ऑप्शन C , ग़ज़वा-ए-बद्र
तफ़सील (विवरण):
📜 दलील:
۞ बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम ۞
अब्दुर रहमान बिन औफ़ (रज़ि.) बयान करते हैं:
“ग़ज़वा-ए-बद्र में मेरे दोनों तरफ़ अंसार के दो नौजवान खड़े थे।
उन्होंने मुझसे कहा: ‘हमें अबू जहल दिखाओ, हम उसे क़त्ल करेंगे क्योंकि वह रसूलअल्लाह ﷺ को गाली देता है।’
फिर उन्होंने अबू जहल को देखकर उस पर हमला किया और उसे क़त्ल कर डाला।
रसूलअल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: ‘तुम दोनों ने ही उसे मारा है।’
उन दोनों के नाम थे – मु’आज़ बिन अफ़रा (रज़ि.) और मु’आज़ बिन अम्र बिन अल-जमूह (रज़ि.)।”
📖 सहीह बुखारी, जिल्द 5, हदीस 3988
⚔️ पृष्ठभूमि:
ग़ज़वा-ए-बद्र इस्लामी इतिहास की पहली जंग थी जिसमें हक़ और बातिल आमने-सामने आए।
अल्लाह ने अपने नबी ﷺ और मुसलमानों को शानदार जीत दी, और अबू जहल जैसे सरकश काफ़िर को धूल चटा दी।



