क़ुरआन के हिसाब से अल-लव्वामह क्या है?

क़ुरआन में कई ऐसे शब्द आते हैं जिनके अंदर गहरी हिकमत छुपी होती है। उनमें से एक शब्द है अल-लव्वामह। अक्सर लोग इसका मतलब गलत समझ लेते हैं।
आइए इस छोटे से शब्द की बड़ी हकीकत को आसान भाषा में समझते हैं।

सवाल: क़ुरआन के हिसाब से अल-लव्वामह क्या है?

  • A. जन्नत की हूर
  • B. दोज़ख़ की आग
  • C. नफ़्स
  • D. क़यामत

सही जवाब है: ऑप्शन C , नफ़्स

तफ़सील (विवरण):

दलील (क़ुरआन का हूबहू टेक्स्ट):

۞ बिस्मिल्लाह-इर-रहमान-इर-रहीम ۞

“हमको क़यामत के रोज़ की क़सम है,
और नफ़्स-ए-लव्वामह की (कि सब लोग उठा कर) खड़े किए जाएंगे।
इंसान ये ख़याल करता है कि उसकी हड्डियाँ इकट्ठी नहीं करेंगे,
ज़रूर करेंगे, और हम इस बात पर क़ादिर हैं कि उसके पोर-पोर भी दुरुस्त कर दें।”

📕 सूरह अल-क़ियामा 75:1-4


मुख्य बात:

अल-लव्वामह उस नफ़्स को कहते हैं जो अपनी गलतियों पर इंसान को मलामत (टोकता/समझाता) करता है।
यानी खुद को सुधारने की कोशिश करने वाला नफ़्स

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