इस्लाम में जिलहिज्जा के पहले दस दिन (अशरा-ए-जिलहिज्जा) बहुत बरकत और फ़ज़ीलत वाले माने गए हैं।
ये वो दिन हैं जिनमें अल्लाह तआला को नेक अमल और इबादतें सबसे ज़्यादा पसंद हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दस रातों का ज़िक्र खुद क़ुरआन में भी आया है?
सवाल: अशरा-ए-जिलहिज्जा का ज़िक्र क़ुरआन की किस सूरह में आया है?
- A. सूरह अल-बक़रह
- B. सूरह अन-निसा
- C. सूरह अल-इन्फितार
- D. सूरह अल-फ़ज्र
सही जवाब है: ऑप्शन D , सूरह अल-फ़ज्र
तफ़सील (विवरण):
📜 दलील:
۞ बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम ۞
अल्लाह तआला क़ुरआन में फ़रमाता है:
“क़सम है फ़ज्र की! और दस रातों की!”
📖 सूरह अल-फ़ज्र (89), आयत 1-2
📚 तफ़सीर:
इमाम इब्न कसीर (रह.) फ़रमाते हैं:
“इस आयत में ‘दस रातों’ से मुराद जिलहिज्जा महीने की पहली दस रातें हैं।”
📕 तफ़सीर इब्न कसीर, सूरह अल-फ़ज्र: 5/559
🌸 सीख:
जिलहिज्जा के पहले दस दिन वो खास वक्त हैं जब अल्लाह की रहमत और बरकतें आम होती हैं।
इन दिनों में रोज़ा रखना, ज़िक्र करना, सदक़ा देना और हज-अकबर (क़ुर्बानी) जैसे अमल बहुत सवाब वाले हैं।



