अक्सर बच्चे झूठ बोलना सबसे पहले किनसे सीखते हैं?

क्या आपने कभी गौर किया है कि बच्चे झूठ बोलना कहाँ से सीखते हैं?
आम तौर पर यह सीख उनके परिवार से ही शुरू होती है।

सवाल: अक्सर बच्चे झूठ बोलना सबसे पहले किनसे सीखते हैं?

  • A. घरवालों से
  • B. बाहरवालों से
  • C. मदरसों से
  • D. स्कूल से

सही जवाब है: ऑप्शन A , घरवालों से

तफ़सील (विवरण):

दलील

अक्सर बच्चे झूठ बोलना सबसे पहले घरवालों से सीखते हैं।

यह बात आप और हम सब जानते हैं कि – बच्चों की तालीम और तर्बियत का सबसे पहला चरण उसके अपने घर और घरवालों से शुरू होता है। इसलिए जिन हालात में बच्चे की तालीम होती है, बच्चा वैसा ही बनता है।


उदाहरण और व्याख्या

आज समाज में झूठ सबसे बड़ी बुराई और फित्ने की वजह बन गया है। आइए समझते हैं कि यह शिक्षा बच्चों को कहाँ से मिलती है।

पहली मिसाल:
यदि आप मार्केटिंग फील्ड में काम करते हैं और घर में हैं, और बॉस का फोन आता है:

“अरे बॉस! मैं तो मार्केट में हूँ, बस क्लाइंट के पास ही पहुँच रहा हूँ।”

बच्चा खड़ा होकर सारी बातें सुनकर समझ जाता है कि आप घर में हैं, लेकिन फोन पर कह रहे हैं कि मार्केट में हैं। इससे बच्चा सीख जाता है कि ऐसा बोलना सही है।

दूसरी मिसाल:
खाला का फोन आया, और माँ फोन पर:

“अच्छा बाज़ी! कल आ रहे हो? नहीं नहीं, कल तो हम बाहर जा रहे हैं, कल मत आइए, हमें कहीं दावत में जाना है।”

बच्चा खुश होकर कहता है:

“अम्मी, कहाँ है दावत?”

माँ बताती हैं:

“अरे कोई दावत नहीं है बेटा, खाला बहुत बोर करती है, इसलिए ऐसा कहना पड़ा।”

इस तरह बच्चा सीख जाता है कि झूठ बोलना चल सकता है।


सबक

इसलिए, बच्चों की सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा यह है कि हम अपने घर में सच्चाई और अच्छे अख़लाक़ की तालीम दें।
अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने हमें हर हाल में सच्चाई को अपनाने और उस पर अमल करने का आदेश दिया है।

♥ इंशाअल्लाह अल-आज़ीज़

  • अल्लाह हमें सही बोलने, सुनने और समझने की तौफ़ीक़ दें।
  • जब तक हम जीवित हैं, हमें इस्लाम और ईमान पर कायम रखें।
  • हमारा अंत हमारे ईमान पर हो।

!!! वा आख़िरु दावना अनिल्हम्दुलिल्लाहिरब्बिल आलमीन !!!

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