हर उम्मत की आज़माइश किसी न किसी चीज़ में है, उम्मते मोहम्मदिया ﷺ की आज़माइश किस चीज़ में है?
हर उम्मत को अल्लाह तआला ने किसी न किसी चीज़ में आज़माया। उम्मते मोहम्मदिया ﷺ की आज़माइश भी अल्लाह ने एक ख़ास चीज़ में रखी […]
हलाल, हराम, शादी, तलाक़ और सामाजिक शिष्टाचार से जुड़े सवालों के लिए।
हर उम्मत को अल्लाह तआला ने किसी न किसी चीज़ में आज़माया। उम्मते मोहम्मदिया ﷺ की आज़माइश भी अल्लाह ने एक ख़ास चीज़ में रखी […]
हमारे शरीर का सबसे अहम अंग कौन सा है? क्या यह दिमाग़ है, आँखें हैं या फिर दिल? इस्लामिक शिक्षाओं के अनुसार, एक ऐसा अंग
क़ुरआन-ए-करीम में अल्लाह ने उन लोगों का ज़िक्र किया है जो दूसरों को उसकी राह से रोकते हैं। यह गुनाह इतना बड़ा है कि उन्हें
अल्लाह की राह से रोकने वाले को क़ुरान में क्या कहा गया है? जवाब देखे »
मीराज़ का वाक़िया इस्लामी इतिहास का एक अहम और इबरतअंगेज़ वाक़िया है। इसमें नबी-ए-करीम ﷺ को जन्नत और जहन्नम के कई मंज़र दिखाए गए। उन्हीं
हर नेक अमल का इंसान को दुनिया और आख़िरत में बड़ा इनाम मिलता है। लेकिन कुछ ख़ास अमल ऐसे हैं जिनकी फ़ज़ीलत इतनी अज़ीम है
इस्लाम ने हमें न सिर्फ़ इबादत का तरीका सिखाया बल्कि खाने-पीने और रहने-सहन के भी शरई उसूल बताए। इन्हीं उसूलों में से एक बड़ा अहम
वो कौन हैं जो अपने पेट में गटागट जहन्नुम की आग भर रहे हैं? जवाब देखे »
इस्लाम ने औरत को इज़्ज़त और हक़ दिए हैं, लेकिन साथ ही कुछ जिम्मेदारियाँ भी रखी हैं। खासतौर पर शादीशुदा ज़िंदगी में बीवी और शौहर
औरत अपने रब का हक़ अदा नहीं कर सकती जब तक वो किसी और का हक़ अदा न कर ले, पर किसका? जवाब देखे »
हर इंसान की ख्वाहिश होती है कि वो जन्नत का हक़दार बने। लेकिन सवाल ये है कि कौन सा अमल सबसे ज्यादा जन्नत में जाने
कौन सी चीज़ जन्नत में जाने की ज़्यादा वजह बनेगी? जवाब देखे »
क़ियामत के दिन हर इंसान के आमाल (अच्छे और बुरे काम) का हिसाब-किताब होगा। उस दिन मोमिन के तराज़ू में कौन सा अमल सबसे भारी
क़ियामत के दिन मोमिन का मीज़ान (तराज़ू) में सबसे वज़नदार अमल कौन सा होगा? जवाब देखे »
सूरह काफ़िरून की फज़ीलत, शिर्क से बचाव, सोने से पहले की दुआ, हदीस इन हिंदी, इस्लामी जानकारी, इस्लामिक सवाल जवाब हिंदी, क़ुरान की सूरह का
क्या आप जानते हैं कि अल्लाह तआला हर रात अपने बंदों से ख़ास अंदाज़ में रहमत और मग़फिरत की पुकार करता है? ये कोई एक
अल्लाह तआला ने इंसान को नेकियों की हिदायत दी है ताकि वो गुनाहों और फितनों से दूर रह सके। लेकिन क्या आप जानते हैं कि
वो कौन सी नेकी है जो इंसान को बेहयाई और बुराई से रोकती है? जवाब देखे »
नमाज़ में जमात का बहुत बड़ा दर्जा है और इसमें पहली सफ़ (लाइन) में खड़े होने वालों के लिए अल्लाह और उसके रसूल ﷺ ने खास फज़ीलत
वो कौन से लोग हैं जिनके लिए रसूलअल्लाह ﷺ तीन मरतबा बख्शिश की दुआ करते थे? जवाब देखे »
जब अज़ान की पुकार गूँजती है, तो यह हमें अल्लाह की याद और नमाज़ की दावत की याद दिलाती है। लेकिन बहुत से लोग नहीं
जब अज़ान सुनो और ये अल्फ़ाज़ आए “हय्या अलस्सलाह” तो इन में से क्या कहना चाहिए? जवाब देखे »
हर मुसलमान की तमन्ना होती है कि वह रात के सुकून भरे लम्हों में उठकर तहज्जुद की नमाज़ अदा करे, लेकिन बहुत से लोग चाहकर
जो शख्स रात को तहज्जुद पढ़ने के लिए बेदार नहीं हो सके, तो वो कौन-सा अमल करे? जवाब देखे »
इस्लाम में इंसान की इज़्ज़त और हिफ़ाज़त को बहुत अहमियत दी गई है। अक्सर लोग यह भूल जाते हैं कि किसी की गैर-मौजूदगी में उसकी इज़्ज़त की
अल्लाह सुब्हानहु क़यामत के दिन इनमें से किसका चेहरा जहन्नम से महफ़ूज़ रखेगा? जवाब देखे »
कभी सोचा है कि इस्लाम में ऐसा कौन-सा नेक अमल है जो नमाज़, रोज़ा और ज़कात जैसे अज़ीम इबादतों से भी ऊँचा दर्जा रखता है? रसूलअल्लाह
वो कौन-सा अमल है जो दर्जे में नमाज़, रोज़े और ज़कात से भी बढ़कर है? जवाब देखे »
रोज़ा सिर्फ़ भूख और प्यास से रुकने का नाम नहीं, बल्कि यह सब्र, तहम्मुल और अल्लाह की रज़ा हासिल करने का ज़रिया है। अल्लाह तआला
रोज़ेदार के सामने जब खाना खाया जाए और वो सब्र करें तो क्या होता है? जवाब देखे »
रमज़ान का महीना रहमतों और बरकतों से भरा होता है। इस मुबारक महीने में हर नेकी और इबादत का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता
रोज़े के दौरान मेडिकल ज़रूरतें कभी-कभी उलझन पैदा कर देती हैं—ख़ासकर इंजेक्शन, दवाई या इलाज के मामले में। एक आम सवाल यह है कि बेहोशी देने
रोज़ेदार अगर एनेस्थेटिक इंजेक्शन (बेहोश करने वाला इंजेक्शन) ले तो क्या होगा? जवाब देखे »
इस्लाम में सलाम करना सिर्फ़ एक आदत या तहज़ीब नहीं, बल्कि एक इबादत और सवाब वाला अमल है। जब कोई मुसलमान दूसरे मुसलमान को सलाम करता है, तो वह प्यार,
अस्सलामु अलैकुम वरहमतुल्लाह कहने पर कितनी नेकियाँ मिलती हैं? जवाब देखे »
रोज़ा सिर्फ़ भूख-प्यास सहने का नाम नहीं, बल्कि रूह की पाकीज़गी का सफ़र है।अल्लाह ने इसे एक ऐसे मक़सद के लिए फ़र्ज़ किया है जो
रोज़े का असल मक़सद क्या है? जवाब देखे »
इस्लाम में मिलने और जुदा होने दोनों के मौके पर सलाम कहना सुन्नत है। यह सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि एक खूबसूरत दुआ है जिसमें अमन, रहमत
किसी मुसलमान से जुदा होते वक्त क्या कहना चाहिए? जवाब देखे »
कभी सोचा है कि रसूलुल्लाह ﷺ जब अपने घर में दाख़िल होते थे तो सबसे पहले कौन-सा काम किया करते थे? यह एक छोटा-सा अमल है, लेकिन
रसूलुल्लाह ﷺ जब घर में तशरीफ़ लाते तो (सलाम के बाद) सबसे पहले क्या करते? जवाब देखे »
इस्लाम में जनाज़े (मय्यत के निकलने) के आदाब बहुत अहमियत रखते हैं। जनाज़े को देखकर इंसान को मौत की याद आती है और आखिरत का एहसास होता
रसूलअल्लाह (ﷺ) ने फरमाया, जब तुम लोग जनाज़ा देखो तो क्या करना चाहिए? जवाब देखे »
“नफ़्ल इबादतें इंसान को अल्लाह के इतना क़रीब कर देती हैं कि अल्लाह तआला उसकी सुनने, देखने और चलने में रहनुमाई फ़रमाता है। जानिए कौन
किसी को माफ़ करना कभी आसान नहीं होता, लेकिन इस्लाम सिखाता है कि माफी देने वाला इंसान अल्लाह के यहाँ बहुत बुलंद दर्जा पाता है।
वह क्या है जो किसी को माफ़ करने पर बढ़ा दिया जाता है? जवाब देखे »
कभी-कभी इंसान ज़िंदगी की तकलीफ़ों से इतना टूट जाता है कि उसे मौत आसान लगने लगती है। लेकिन इस्लाम इंसान को मायूसी में नहीं गिरने
तकलीफ़ों से तंग आकर मौत की तमन्ना करना कैसा है? जवाब देखे »
इस्लाम ने हमेशा इंसानियत और भाईचारे को बढ़ावा दिया है। यही कारण है कि यह समाज में फैलने वाली हर बुराई पर सख्त रुख रखता
हमारा दिन कई छोटे-बड़े कामों से भरा होता है, और इस्लाम ने हमारे हर छोटे काम को इबादत बनाने का तरीका बताया है। इसमें यात्रा
वह कौन सी दुआ है जो लफ़्ज़ “सुब्हान” से शुरू होती है? जवाब देखे »