इस्लाम में निकाह एक पाक और मुक़द्दस इबादत है, जिसमें महर औरत का हक़ है। अगर पति तय किया हुआ महर अदा नहीं करता, तो यह कोई मामूली कोताही नहीं बल्कि बड़ा गुनाह है।
सवाल: तय किया हुआ महर अगर शौहर अदा न करे तो वो कौन-से गुनाह का मुरतकिब होगा?
- A. चोरी
- B. बख़ीली
- C. ज़िना
- D. सही जवाब का इंतज़ार
सही जवाब है: ऑप्शन C , ज़िना
तफ़सील (विवरण):
दलील (हदीस से)
📕 हदीस
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
“जो शख़्स निकाह करे और महर देने की नीयत न हो, उसने ज़िना किया। और जो शख़्स उधार ले और लौटाने की नीयत न हो, उसने डाका डाला।”
(अत-तरगीब वत्तर्हीब, हदीस 1807)
नसीहत
महर औरत का हक़ है और इसे अदा करना शौहर पर फ़र्ज़ है। जो लोग इस हक़ को नज़रअंदाज़ करते हैं, वे अल्लाह के यहाँ सख़्त गुनाहगार होंगे। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने निकाह और रिश्तों को पाक और हलाल तरीक़े से निभाएँ और महर अदा करने में कोताही न करें।
