(मैं अपनी परेशानियों और रंज की फरियाद अल्लाह ही से करता हूँ) – ये अल्फ़ाज़ किस नबी ने अपने बेटों से कहा था?

हर इंसान की ज़िंदगी में ग़म और परेशानियाँ आती हैं। ऐसे में अक्सर लोग इंसानों के सामने अपनी फरियाद रखते हैं। लेकिन क़ुरान हमें यह सिखाता है कि असली सहारा और मददगार सिर्फ़ अल्लाह तआला है। इसी हक़ीक़त को एक नबी अलैहिस्सलाम ने अपने बेटों से ज़िक्र किया।

सवाल: (मैं अपनी परेशानियों और रंज की फरियाद अल्लाह ही से करता हूँ) – ये अल्फ़ाज़ किस नबी ने अपने बेटों से कहा था?

  • A. हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम)
  • B. हज़रत इसहाक़ (अलैहिस्सलाम)
  • C. हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम)
  • D. हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम)

सही जवाब है: ऑप्शन C , हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम)

तफ़सील (विवरण):

दलील

अल्लाह तआला क़ुरआन मजीद में फ़रमाता है:
“(याक़ूब अलैहिस्सलाम ने अपने बेटों से कहा) – मैं तो अपनी परेशानियों और रंज की फरियाद अल्लाह ही से करता हूँ, और मुझे अल्लाह की तरफ़ से वो बातें मालूम हैं जो तुम नहीं जानते।”
📕 सूरह यूसुफ़ 12:86

सीख

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हर ग़म, तकलीफ़ और परेशानी का हल इंसानों से माँगने के बजाय अल्लाह से माँगना चाहिए। इंसान की मदद सीमित है, लेकिन अल्लाह की मदद बेमिसाल है।

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