कौन सा ऐसा अमल है जो अल्लाह के इतने क़रीब कर देता है कि अल्लाह बंदे की सुनने, देखने, पकड़ने और चलने में उसकी मदद करता है?

“नफ़्ल इबादतें इंसान को अल्लाह के इतना क़रीब कर देती हैं कि अल्लाह तआला उसकी सुनने, देखने और चलने में रहनुमाई फ़रमाता है। जानिए कौन सा अमल बंदे को इस महान मकाम तक पहुँचाता है।”

सवाल: कौन सा ऐसा अमल है जो अल्लाह के इतने क़रीब कर देता है कि अल्लाह बंदे की सुनने, देखने, पकड़ने और चलने में उसकी मदद करता है?

  • A. फ़र्ज़ नमाज़ अदा करना
  • B. रमज़ान के रोज़े रखना
  • C. हज अदा करना
  • D. नफ़्ल इबादत करना

सही जवाब है: ऑप्शन D , नफ़्ल इबादत करना

तफ़सील (विवरण):

📜 दलील (हदीस):

۞ बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्हीम ۞

अबू हुरैरा (रज़ि.) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:

“मेरा बंदा नफ़्ल इबादतों के ज़रिए मुझसे इतना क़रीब हो जाता है कि मैं उसका कान बन जाता हूँ जिससे वह सुनता है, उसकी आँख बन जाता हूँ जिससे वह देखता है, उसका हाथ बन जाता हूँ जिससे वह पकड़ता है, और उसका पाँव बन जाता हूँ जिससे वह चलता है।”

📖 सहीह बुख़ारी, हदीस 6502


🌙 इस हदीस का मतलब:

इसका मतलब यह नहीं कि अल्लाह सचमुच कान, आँख या हाथ बन जाता है —
बल्कि “अल्लाह तआला उस बंदे को उसके हर काम में रहनुमाई, हिदायत, हिफ़ाज़त और तौफ़ीक़ अता फ़रमा देता है।”

अल्लाह उसके दिल, नज़र, सोच और अमल को अपने नूर से सही रास्ते पर चला देता है।


💬 सीख:

  • फ़र्ज़ इबादतें फर्ज़ हैं — उनके बिना कोई नज़दीकी नहीं।
  • लेकिन नफ़्ल इबादतें (तहज्जुद, नफ़्ल रोज़े, नफ़्ल सदक़ा, ज़िक्र, कुरान पढ़ना)
    इंसान को विलायत (अल्लाह का ख़ास दोस्त) के दर्ज़े तक ले जाती हैं।

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