रोज़े का असल मक़सद क्या है?

रमज़ान का महीना बरकतों और रहमतों से भरा हुआ है। लेकिन रोज़े का असल मक़सद सिर्फ भूखे-प्यासे रहना या इफ़्तार की दावतें करना नहीं है, बल्कि इससे कहीं ज़्यादा गहरा और अहम मक़सद है।

सवाल: रोज़े का असल मक़सद क्या है?

  • A. इफ़्तार पार्टी
  • B. परहेज़गारी
  • C. रस्म
  • D. सही जवाब का इंतज़ार

सही जवाब है: ऑप्शन B , परहेज़गारी

दलील (क़ुरआन से)

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने फ़रमाया:

“ऐ ईमान वालो! तुम पर रोज़े फ़र्ज़ किए गए, जैसे तुमसे पिछली उम्मतों पर फ़र्ज़ किए गए थे, ताकि तुम तक़वा (परहेज़गारी) इख़्तियार करो।”
📕 सूरह बक़राह 2:183


रोज़े और तक़वा का रिश्ता

  • तक़वा रोज़े का असल पैग़ाम है।
  • जब इंसान में अल्लाह का डर पैदा हो जाता है, तो वह हलाल और हराम में फ़र्क करने लगता है।
  • वह धोखेबाज़ी, झूठ, ज़िना, शराब, जुआ और तमाम बुरी आदतों से दूर रहने लगता है।
  • दुनिया की बजाए आख़िरत को अहमियत देता है।

नसीहत

रोज़े का असल मक़सद तक़वा है। अगर रोज़ा हमें गुनाहों से नहीं रोकता और अल्लाह का डर हमारे दिल में पैदा नहीं करता, तो हमें अपने अमल की समीक्षा करनी चाहिए।

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