रोज़ा सिर्फ़ भूख-प्यास सहने का नाम नहीं, बल्कि रूह की पाकीज़गी का सफ़र है।
अल्लाह ने इसे एक ऐसे मक़सद के लिए फ़र्ज़ किया है जो इंसान की जिंदगी बदल देता है। आइए जानते हैं कि कुरआन रोज़े का असल मक़सद क्या बताता है।
सवाल: रोज़े का असल मक़सद क्या है?
- A. खाना बचाना
- B. खाना खिलाना
- C. परहेज़गारी
- D. सहरी और इफ्तारी
सही जवाब है: ऑप्शन C , परहेज़गारी
तफ़सील (विवरण):
📜 दलील (कुरआन से)
۞ बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम ۞
“ऐ ईमान वालों! तुम पर रोज़े फ़र्ज़ किए गए, जैसा कि तुमसे पहले की उम्मतों पर फ़र्ज़ किए गए थे, ताकि तुम तक़वा (परहेज़गारी) इख्तियार करो।”
📕 कुरआन — सूरह अल-बक़रा, आयत 183
✨ रोज़े का असल मक़सद क्या है?
- दिल में अल्लाह का डर पैदा हो
- अपने नफ़्स को काबू में रखना
- गुनाहों से बचना
- इंसानियत, सब्र और शुकर की आदत डालना
रोज़ा इंसान को अंदर से बदल देता है — यही है तक़वा, और यही रोज़े का असली मक़सद है।



