क़ुरबानी एक अहम इबादत है जो तक़वा, ईमान और अल्लाह की बंदगी की निशानी है। बहुत से लोग यह सवाल करते हैं कि क्या क़ुरबानी का अमल सिर्फ़ उम्मते मुहम्मद ﷺ के लिए है या पिछली उम्मतों के लिए भी था?
सवाल: क़ुरबानी का अमल किस उम्मत के लिए अल्लाह ने अता किया?
- A. उम्मते मुहम्मदी ﷺ
- B. उम्मते मूसा (अ.स.)
- C. उम्मते ईसा (अ.स.)
- D. हर उम्मत
सही जवाब है: ऑप्शन D , हर उम्मत
तफ़सील (विवरण):
📜 दलील
क़ुरबानी का अमल अल्लाह तआला ने हर उम्मत को अता किया है।
क़ुरआन से सबूत:
“हमने हर उम्मत के लिए क़ुरबानी का दिन तय किया है, ताकि अल्लाह ने जो जानवर उन्हें बतौर रिज़्क़ दिए हैं, उन्हें अल्लाह का नाम लेकर ज़बह करें।”
📕 सूरह अल-हज, 22:34
इब्ने अल-जौज़ी (रह.) फ़रमाते हैं:
इस आयत का मतलब यह है कि क़ुरबानी करना सिर्फ़ इस उम्मत की ख़ुसूसियत नहीं बल्कि अल्लाह का नाम लेकर क़ुरबानी करना पिछली उम्मतों में भी मौजूद था।
📕 तफ़्सीर ज़ादुल मसीर, इब्ने जौज़ी
🕌 निष्कर्ष
क़ुरबानी अल्लाह की एक मुहिम इबादत है जो हर उम्मत को अता हुई थी। यह हमें बताती है कि अल्लाह का नाम लेकर क़ुरबानी करना एक पुरानी सुन्नत है, जिसे उम्मते मुहम्मद ﷺ ने भी जारी रखा और पूरा किया।

