नबी-ए-पाक ﷺ के मुबारक नाम और उपाधियाँ (कुन्नियत) मुसलमानों के लिए इल्म और अदब का अहम हिस्सा हैं। कुन्नियत उस नाम को कहा जाता है जो “अबू” या “उम्म” से शुरू होता है — यानी “फलाँ का बाप” या “फलाँ की माँ”। आइए जानते हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ की कुन्नियत क्या थी।
सवाल: रसूलुल्लाह ﷺ की कुन्नियत क्या है?
- A. मुज़म्मिल
- B. अबू क़ासिम
- C. बिन अब्दुल मुत्तलिब
- D. अहमद
सही जवाब है: ऑप्शन B , अबू क़ासिम
तफ़सील (विवरण):
📜 दलील:
۞ बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम ۞
📖 हदीस:
अनस बिन मालिक (रज़ि.) से रिवायत है:
रसूलुल्लाह ﷺ बाज़ार में थे, एक साहाबी ने आवाज़ दी —
“या अबू क़ासिम!”
तो नबी ﷺ उनकी तरफ़ मुतवज्जेह हुए, लेकिन मालूम हुआ कि उन्होंने किसी और को पुकारा था। इस पर नबी ﷺ ने फ़रमाया:
“मेरे नाम पर नाम रखो, लेकिन मेरी कुन्नियत मत रखो।”
📕 सहीह बुख़ारी, हदीस नं. 3537
🌸 सीख:
नबी ﷺ की कुन्नियत “अबू क़ासिम” थी, जो उनके बेटे हज़रत क़ासिम (रज़ि.) के नाम पर थी।
इस हदीस से हमें यह भी पता चलता है कि मुसलमानों को रसूलुल्लाह ﷺ के अदब और इज़्ज़त का ख़ास ख़याल रखना चाहिए —
उनके नाम पर नाम रख सकते हैं, मगर कुन्नियत नहीं रखनी चाहिए।



