इस्लाम में दूसरों की बातें छिपकर सुनना
इस्लाम में दूसरों की बातें छिपकर सुनना एक बड़ा गुनाह बताया गया है।
क़यामत के दिन ऐसे लोगों के लिए बहुत ही दर्दनाक अज़ाब का ज़िक्र हदीस में आया है — जहां उनके कानों में पिघला हुआ शीशा डाला जाएगा!
सवाल: क़यामत के दिन किसके कानों में शीशा पिघला कर डाला जाएगा?
- A. जो क़ुरआन ना पढ़े, ना सुने
- B. जो चुपके से लोगों की बातें सुने
- C. जो गैर-महरम की आवाज़ सुने
- D. जो हदीस सुने मगर अमल ना करे
सही जवाब है: ऑप्शन B , जो चुपके से लोगों की बातें सुने
तफ़सील (विवरण):
📜 दलील:
۞ बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम ۞
हदीस:
इब्न अब्बास (रज़ि अल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि
रसूल-ए-अल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
“जो शख्स लोगों की बातें चुपके से सुनता है, जबकि वे उसे पसंद नहीं करते,
क़यामत के दिन उसके कानों में शीशा पिघला कर डाला जाएगा।”
📕 सहीह बुख़ारी, हदीस 7042
💬 सीख:
इस हदीस से हमें सिखाया गया है कि दूसरों की निजता का एहतिराम करना बहुत ज़रूरी है।
चाहे वो किसी की बातचीत सुनना हो, चैट पढ़ना हो, या उनकी बातें जानने की कोशिश करना —
इस्लाम में यह हराम है।
अल्लाह तआला ने इंसान को इज़्ज़त और हुरमत दी है, और जो इसका उल्लंघन करेगा, उसे आख़िरत में सख़्त सज़ा दी जाएगी।



