इस्लाम में क़सम बहुत अहमियत रखती है। लेकिन क़सम सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह तआला के नाम की खाई जानी चाहिए। अल्लाह के अलावा किसी और की क़सम खाना बहुत बड़ा गुनाह है। आइए हदीस की रोशनी में इस मसले को समझते हैं।
सवाल: अल्लाह के अलावा किसी और की क़सम खाना कौन-सा गुनाह है?
- A. शिर्क
- B. बिदअत
- C. सगीरा गुनाह
- D. सही जवाब का इंतज़ार
सही जवाब है: ऑप्शन A , शिर्क
तफ़सील (विवरण):
दलील 1:
📕 हदीस: रसूलुल्लाह ﷺ फ़रमाते हैं –
“जिसने अल्लाह के अलावा किसी की क़सम खाई, उसने कुफ़्र किया या शिर्क किया।”
(मुस्नद अहमद 2/34, तिर्मिज़ी 2/99)
दलील 2:
📕 हदीस: रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया –
“अपने माँ-बाप और बुतों की क़सम न खाओ और न ही अल्लाह के अलावा किसी और की क़सम खाओ। अगर क़सम खाने की ज़रूरत पड़ जाए तो सिर्फ़ अल्लाह की सच्ची क़सम खाओ।”
(सुन्नन नसाई #3769)
नसीहत
अल्लाह तआला ने हमें शिर्क से बचने और तौहीद पर क़ायम रहने की तालीम दी है। क़सम सिर्फ़ अल्लाह के नाम की खाई जानी चाहिए। माँ-बाप, औलिया, नबी या किसी और की क़सम खाना इस्लाम में हराम और शिर्क के दायरे में आता है।
अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त हमें कहने-सुनने से ज़्यादा अमल की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
