इंसान की ज़िंदगी उतार-चढ़ाव और मुश्किलों से भरी हुई है। कभी तंगी, कभी बीमारी, कभी मुसीबत – यह सब अल्लाह की तरफ़ से इम्तिहान होते हैं। सवाल यह है कि जब अल्लाह किसी को मुश्किल में डाल देता है, तो उसे निजात दिलाने की क़ुदरत किसके पास है?
सवाल: जब अल्लाह किसी को मुश्किलों में डाल दे तो उसे कौन निजात दिलाने पर क़ादिर है?
- A. फ़रिश्ते
- B. अंबिया (अलैहिस्सलाम)
- C. अल्लाह के वली
- D. सिर्फ़ अल्लाह
सही जवाब है: ऑप्शन D , सिर्फ़ अल्लाह
तफ़सील (विवरण):
दलील (हदीस से)
📕 हदीस (तिरमिज़ी शरीफ़)
हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास रज़ि अल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं:
रसूलअल्लाह ﷺ ने मुझे नसीहत करते हुए फ़रमाया:
“ऐ अब्दुल्लाह! जब कुछ माँगना हो तो सिर्फ़ अल्लाह से माँगो। जब मदद माँगना हो तो सिर्फ़ अल्लाह से माँगो। अगर पूरी दुनिया मिलकर तुम्हें फ़ायदा पहुँचाना चाहे, तो नहीं पहुँचा सकती, मगर वही जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए लिख दिया है। और अगर पूरी दुनिया तुम्हें नुक़सान पहुँचाना चाहे, तो नहीं पहुँचा सकती, मगर वही जो अल्लाह ने तुम्हारे मुक़द्दर में लिख दिया है। क़लम उठा लिया गया और स्याही सूख चुकी है।”
📖 मफ़हूम-ए-हदीस (मुस्नद अहमद)
“अल्लाह की मदद सब्र के साथ है, राहत तकलीफ़ के साथ है और आसानी तंगी के साथ है।”
नसीहत
इंसान को हर हाल में अल्लाह की तरफ़ रुजू करना चाहिए। अगर मदद चाहिए, तो सिर्फ़ उसी से माँगना चाहिए। कोई भी वली, नबी या फ़रिश्ता अल्लाह की इजाज़त के बग़ैर किसी की मुश्किल हल नहीं कर सकता।इंसान की ज़िंदगी उतार-चढ़ाव और मुश्किलों से भरी हुई है। कभी तंगी, कभी बीमारी, कभी मुसीबत – यह सब अल्लाह की तरफ़ से इम्तिहान होते हैं। सवाल यह है कि जब अल्लाह किसी को मुश्किल में डाल देता है, तो उसे निजात दिलाने की क़ुदरत किसके पास है?

