वो कौन लोग होंगे जिन्हें रोज़-ए-क़यामत हौज़-ए-कौसर से हटा दिया जाएगा?

क़यामत के दिन हौज़-ए-कौसर एक ऐसी नेमत है, जिससे पीने वाला कभी प्यासा नहीं होगा। लेकिन सोचने वाली बात यह है कि कुछ लोग उसी हौज़-ए-कौसर से धक्का देकर दूर कर दिए जाएंगे। आखिर वो लोग कौन होंगे?

सवाल: वो कौन लोग होंगे जिन्हें रोज़-ए-क़यामत हौज़-ए-कौसर से हटा दिया जाएगा?

  • A. काफ़िर
  • B. मुशरिक
  • C. बिदअती
  • D. सही जवाब का इंतज़ार

सही जवाब है: ऑप्शन C , बिदअती

तफ़सील (विवरण):

दलील (हदीस से)

रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:

“कुछ लोग क़यामत के दिन मेरे पास आएंगे। हौज़-ए-कौसर पर मेरा मिंबर होगा और वहाँ आसमान के सितारों जैसी प्यालियाँ होंगी। मैं अपने उम्मतियों को हौज़-ए-कौसर का पानी पिलाऊँगा। जो एक बार पी लेगा, उसे फिर कभी प्यास नहीं लगेगी।

लेकिन कुछ लोग आएंगे और फ़रिश्ते उन्हें धक्का देकर हौज़-ए-कौसर से दूर कर देंगे। मैं कहूँगा: ‘ये मेरे उम्मती हैं फ़रिश्तों! इन्हें आने दो।’

तो फ़रिश्ते कहेंगे: ‘ऐ अल्लाह के रसूल ﷺ! आपको मालूम नहीं, ये लोग आपके जाने के बाद आपके दीन में बिदअतें इजाद करने लगे थे।’

तब रसूलुल्लाह ﷺ फ़रमाएँगे: ‘दूर ले जाओ! इन्हें मेरी नज़रों से दूर कर दो! इन्होंने मेरे जाने के बाद मेरे दीन में बदलाव किया।’”

📕 सहीह बुख़ारी, जिल्द 3, हदीस नं. 1931, बाब: फ़ित्नों का बयान
(सहीह बुख़ारी वॉल . 9, बुक 88, हदीस नं. 173 & 174)


दूसरी हदीस

रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:

“जो शख़्स बिदअत करता है, उसकी तौबा क़बूल नहीं होती।”
📕 तबरानी


सीख और नसीहत

  • दीन में नयी बातें (बिदअत) लाने वालों के लिए अल्लाह के यहाँ कोई जगह नहीं।
  • उनके आमाल नामंज़ूर होंगे और उन्हें हौज़-ए-कौसर से भी दूर कर दिया जाएगा।
  • दुनियावी इजादें, टेक्नोलॉजी, तिजारत में नयापन लाना मुनासिब है, मगर दीन में नई इजादें करना हराम और गुमराही है।
  • इसलिए अगर हम चाहते हैं कि हमारी तौबा क़बूल हो और हमारे आमाल अल्लाह के नज़दीक क़बूलियत पाएं, तो हमें हर बिदअत से बचना होगा और सुन्नत-ए-रसूल ﷺ को थामे रखना होगा।

दुआ

या अल्लाह! हमें सुनने से ज्यादा अमल की तौफ़ीक़ अता फ़रमा। हमें हर बिदअत से बचा और सुन्नत-ए-रसूल ﷺ पर मज़बूत रख। आमीन, अल्लाहुम्मा आमीन।

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