इस्लाम में यतीम (अनाथ) बच्चों के हक़ की हिफ़ाज़त पर बहुत ज़ोर दिया गया है।
अल्लाह तआला ने क़ुरआन में उन लोगों को सख्त चेतावनी दी है जो यतीमों का माल ज़ुल्म से खा जाते हैं —
ऐसे लोग अपने पेट में दोज़ख की आग भरते हैं!
सवाल: “वो अपने पेट में दोज़ख की आग भरते हैं, और अनक़रीब आग में दाख़िल होंगे।” वो कौन लोग हैं?
- A. शराब पीने के आदी
- B. सूद खाने वाले
- C. यतीम का माल खाने वाले
- D. इनमें से कोई नहीं
सही जवाब है: ऑप्शन C , यतीम का माल खाने वाले
तफ़सील (विवरण):
📜 दलील:
۞ बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम ۞
अल्लाह तआला क़ुरआन में फ़रमाता है:
“बेशक जो लोग यतीमों का माल नाहक़ खाते हैं, वो अपने पेट में दोज़ख़ की आग भरते हैं, और अनक़रीब आग में दाख़िल होंगे।”
📖 सूरह अन-निसा (4), आयत 10
💭 सीख:
इस आयत से हमें सख्त नसीहत मिलती है कि यतीमों की अमानत, उनका माल या हक़ नाजायज़ तरीक़े से खाना बहुत बड़ा गुनाह है।
जो लोग ऐसा करते हैं, वो दरअसल दुनिया में नहीं बल्कि आख़िरत में अपने लिए आग जमा करते हैं।
इसलिए, यतीमों के साथ रहम, न्याय और अमानतदारी से पेश आना एक सच्चे मोमिन की पहचान है।



