गाली-गलौच इस्लाम की नज़र में बहुत ही नापसंद चीज़ है। यह इंसान के ईमान और अख़लाक़ को कमज़ोर कर देती है और समाज में नफरत फैलाती है। आइए जानते हैं कि हदीस की रोशनी में गाली देने की फ़ितरत किसकी है।
सवाल: इनमें से किसकी फ़ितरत है गाली-गलौच करना?
- A. मोमिन
- B. फ़रिश्ते
- C. शैतान
- D. सही जवाब का इंतज़ार
सही जवाब है: ऑप्शन C , शैतान
तफ़सील (विवरण):
दलील 1:
📕 हदीस: नबी-ए-करीम ﷺ ने फ़रमाया –
“गाली-गलौच करने वाले दोनों शैतान हैं, जो एक-दूसरे पर इल्ज़ाम लगाते और झूठ बोलते हैं।”
(मुस्नद-ए-अहमद: 17483)
दलील 2:
📕 हदीस: रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया –
“एक मुनाफ़िक़ की अलामत है गाली देना।”
(सहीह अल-बुख़ारी, हदीस 2459)
नसीहत
गाली-गलौच शैतान की फ़ितरत है और यह एक मुनाफ़िक़ की पहचान भी बताई गई है। अफ़सोस की बात है कि आज यह बुराई हमारी उम्मत में आम हो चुकी है। छोटे से छोटे इख़्तिलाफ़ पर भी गाली देना आम बात बन गई है।
हमें चाहिए कि हम खुद भी गाली-गलौच से बचें और दूसरों को भी इसकी तालीम दें। इस्लाम हमें हमेशा अख़लाक़-ए-हसना यानी अच्छे चरित्र अपनाने की हिदायत देता है।
अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त हमें तमाम बुरी आदतों से बचाए और ईमान पर ज़िंदा रखे, तथा ईमान पर ही हमारा खात्मा फ़रमाए। आमीन।

