हम रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में “इनशा-अल्लाह” बोलते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे भूल से न कहने के कारण रसूल ﷺ पर एक अरसे तक वही का सिलसिला बंद हो गया था? यह घटना हमें अल्लाह पर भरोसा और सही नियत की अहमियत सिखाती है।
सवाल: किस अल्फ़ाज़ के भूल से “ना” कहने के कारण रसूल ﷺ पर एक अरसे तक वही का सिलसिला बंद रहा?
- A. सुब्हानल्लाह
- B. इंशाल्लाह
- C. अल्हम्दुलिल्लाह
- D. सही जवाब का इंतजार
सही जवाब है: ऑप्शन B , इंशाल्लाह
तफ़सील (विवरण):
दलील
कुछ यहूदी रसूल ﷺ के पास आए और अस्हाबे कहफ का वाक़िया पूछा।
रसूल ﷺ ने उन्हें इंशाल्लाह कहे बिना कल आने को कहा।
इस भूल के कारण अल्लाह ने एक समय तक वही का सिलसिला रोक दिया।
फिर यह आयत नाज़िल हुई:
❝और हरगिज़ किसी काम के निस्बत न कहा करो कि मैं इसे कल कर दूंगा, मगर इंशाल्लाह कह कर और अगर भूल जाओ तो (जब याद आए) अपने परवरदीगर को याद कर लो।❞
📕 अल-कुरआन, सूरह अल-कहफ़ 18:24
सीख
- अल्लाह की मदद के बिना हम किसी काम को अंजाम नहीं दे सकते।
- हर काम शुरू करने से पहले इंशाल्लाह कहना चाहिए।
- अल्लाह से दुआ करें कि हमारी सभी नियतें और काम सही हों, और हम हमेशा इस्लाम और इमान पर अडिग रहें।



