जिब्रील (अलैहिस्सलाम) वो बरकतवाले फरिश्ते हैं जो अल्लाह तआला की तरफ़ से वही (इल्हाम) लेकर नबी और रसूलों के पास आते रहे।
क़ुरआन मजीद में उनका नाम सिर्फ़ कुछ ही जगहों पर आया है, लेकिन उनका मक़ाम बेहद आला और मुबारक है।
आइए जानते हैं — क़ुरआन में जिब्रील (अलैहिस्सलाम) का नाम कितनी बार आया है।
सवाल: क़ुरआन में जिब्रील (अलैहिस्सलाम) का नाम कितनी बार आया है?
- A. 1 बार
- B. 2 बार
- C. 3 बार
- D. 4 बार
सही जवाब है: ऑप्शन C , 3 बार
तफ़सील (विवरण):
📖 दलील
۞ बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम ۞
1️⃣ सूरह अल-बक़रह (2), आयत 97:
“कह दो: जो शख्स जिब्रील का दुश्मन हो, तो उसने (क़ुरआन) अल्लाह के हुक्म से तुम्हारे दिल पर उतारा, जो पहले की किताबों की तस्दीक करता है और मोमिनों के लिए हिदायत और बशारत है।”
2️⃣ सूरह अल-बक़रह (2), आयत 98:
“जो अल्लाह, उसके फरिश्तों, उसके रसूलों, जिब्रील और मीकाईल का दुश्मन हो — अल्लाह भी ऐसे काफ़िरों का दुश्मन है।”
3️⃣ सूरह अत-तहरीम (66), आयत 4:
“बेशक अल्लाह उनका मददगार है, और जिब्रील, नेक मोमिन और सब फरिश्ते भी उनके हामी हैं।”
🌿 तफ़्सीर और सीख
जिब्रील (अलैहिस्सलाम) को रूहुल-अमीन और रूहुल-कुदुस भी कहा गया है।
उन्होंने नबी मुहम्मद ﷺ पर वही (क़ुरआन) उतारी, हजरत मरयम (अलैहा सलाम) को ईसा (अलैहिस्सलाम) की खुशखबरी दी,
और तमाम नबियों तक अल्लाह का पैगाम पहुँचाने का काम किया।
क़ुरआन में उनका नाम सिर्फ़ तीन बार आया है, मगर उनका ज़िक्र और किरदार पूरे इस्लामी इतिहास में फैला हुआ है।



