इस्लामी इतिहास की सबसे अहम जंग — ग़ज़वा-ए-बद्र — में एक ऐसा वाक़या भी हुआ जो हक़ और बातिल के फ़र्क़ को हमेशा के लिए बयान कर गया।
इस जंग में शैतान ने काफ़िरों को धोखा देने के लिए उन के दिलों में झूठा जोश भरा था।
सवाल: जंग-ए-बद्र में किसने कहा: “आज कोई तुम पर ग़ालिब नहीं होगा, मैं तुम्हारा हिमायती हूँ”?
- A. अबू सुफ़यान
- B. अबू लहब
- C. शैतान
- D. अबू जहल
सही जवाब है: ऑप्शन C , शैतान
तफ़सील (विवरण):
📜 दलील:
۞ बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम ۞
अल्लाह तआला फ़रमाता है:
“और जब शैतान ने उनके आमाल को उनके लिए ख़ूबसूरत बना दिया और कहा:
‘आज के दिन तुम पर कोई ग़ालिब नहीं होगा, मैं तुम्हारा हिमायती हूँ।’
लेकिन जब दोनों फ़ौजें आमने-सामने आईं तो वह पलट गया और बोला:
‘मैं तुम से बरी हूँ, मैं वह देख रहा हूँ जो तुम नहीं देखते। मैं अल्लाह से डरता हूँ, और अल्लाह सख़्त अज़ाब देने वाला है।’”
📖 सूरह अल-अनफ़ाल (8), आयत 48
⚔️ तफ़सीर और पृष्ठभूमि:
तफ़सीर इब्न कसीर के मुताबिक,
शैतान ने कुफ़्फ़ार-ए-मक्का के सामने सुराक़ा बिन मालिक की शक्ल में आकर उन्हें हिम्मत दी।
उसने कहा — “आज कोई तुम पर ग़ालिब नहीं होगा” — ताकि मुसलमानों के ख़िलाफ़ उन्हें उकसाया जा सके।
लेकिन जब उसने फ़रिश्तों को जंग के मैदान में उतरते हुए देखा,
तो वह डर गया और भाग खड़ा हुआ, कहते हुए —
“मैं तुमसे बरी हूँ, मैं अल्लाह से डरता हूँ।”
इस तरह शैतान ने अपने अनुयायियों को बीच मैदान में छोड़ दिया और भाग निकला।



