रमज़ान का महीना रहमत, बरकत और मग़फ़िरत का महीना है। इस मुबारक महीने में अल्लाह तआला अपने बंदों पर रहमत के दरवाज़े खोल देता है और जहन्नम के दरवाज़े बंद कर देता है। आइए जानते हैं कि रमज़ान के आते ही जन्नत के कौन-कौन से दरवाज़े खुलते हैं।
सवाल: रमज़ान के आते ही जन्नत का कौन-सा दरवाज़ा खुलता है?
- A. बाब-अर-रय्यान
- B. बाब-अस-सलाह
- C. बाब-अस-सदक़ा
- D. सही जवाब का इंतज़ार
सही जवाब है: ऑप्शन A B C ,
तफ़सील (विवरण):
📜 दलील:
۞ बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम ۞
📖 हदीस:
हज़रत अबू हुरैरा (रज़ि.) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
“जब रमज़ान की पहली रात आती है तो शयातीन और सख्त जन्न (जिन्नात) कैद कर दिए जाते हैं,
जहन्नम के सारे दरवाज़े बंद कर दिए जाते हैं — एक भी दरवाज़ा खुला नहीं रहता,
और जन्नत के सारे दरवाज़े खोल दिए जाते हैं, एक भी दरवाज़ा बंद नहीं रहता।”
📕 सुनन इब्ने माजह, हदीस नं. 1642 (हसन)
🌸 सीख:
रमज़ान में जन्नत के सारे दरवाज़े रहमत और बरकत के लिए खोल दिए जाते हैं।
खास तौर पर “बाब-अर-रय्यान” वो दरवाज़ा है जिससे सिर्फ़ रोज़ेदार दाख़िल होंगे।
इसलिए हमें चाहिए कि रमज़ान में खूब इबादत, सदक़ा, नमाज़ और रोज़े का एहतमाम करें ताकि इन दरवाज़ों से दाख़िल होने वालों में हमारा नाम भी हो, इंशा’अल्लाह।



