रोज़ा सिर्फ़ भूख और प्यास से रुकने का नाम नहीं, बल्कि यह सब्र, तहम्मुल और अल्लाह की रज़ा हासिल करने का ज़रिया है। अल्लाह तआला उन रोज़ेदारों को ख़ास इनाम देता है जो हर हाल में सब्र करते हैं — यहाँ तक कि जब उनके सामने कोई खा ले, तब भी वे शिकायत नहीं करते।
सवाल: रोज़ेदार के सामने जब खाना खाया जाए और वो सब्र करें तो क्या होता है?
- A. उस पर जन्नत वाजिब हो जाती है
- B. जहन्नम से हमेशा की निजात
- C. फ़रिश्ते उसके लिए दुआ करते हैं
- D. सही जवाब का इंतज़ार
सही जवाब है: ऑप्शन C , फ़रिश्ते उसके लिए दुआ करते हैं
तफ़सील (विवरण):
दलील
۞ हदीस: उम्मे उमारा (रज़ि.) से रिवायत है कि रसूलअल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया:
“रोज़ेदार के सामने जब खाना खाया जाए और वो सब्र करे तो फ़रिश्ते उसके लिए दुआ करते हैं।”
📕 सुनन इब्न माजा, जिल्द 1, हदीस 1748 — हसन
हिकमत:
यह हदीस हमें सिखाती है कि रोज़ा सिर्फ भूख-प्यास का नाम नहीं, बल्कि सब्र, अख़लाक़ और अल्लाह की रज़ा का इम्तिहान है। जो इंसान ऐसी हालत में भी सब्र करता है, अल्लाह तआला उसके लिए रहमत के दरवाज़े खोल देता है।



