कुरआन में कई ऐसे वाक़ियात हैं जो इंसान के ईमान को मज़बूत करते हैं। उनमें से एक हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) का वाक़िया है, जब उन्होंने अल्लाह तआला से एक अनोखी दुआ की — “ए मेरे रब! मुझे दिखा कि तू मुर्दों को कैसे ज़िंदा करता है।” आइए जानते हैं इस मुक़द्दस बातचीत का ज़िक्र कुरआन में कैसे आया है।
सवाल: अल्लाह सुब्हानहु से ये बात किसने कही थी: “ए मेरे रब! मुझे दिखा कि तू मुर्दों को कैसे ज़िंदा करेगा?”
- A. मूसा (अलैहिस्सलाम)
- B. यूनुस (अलैहिस्सलाम)
- C. इब्राहीम (अलैहिस्सलाम)
- D. ख़िज़्र (अलैहिस्सलाम)
सही जवाब है: ऑप्शन C , इब्राहीम (अलैहिस्सलाम)
तफ़सील (विवरण):
📜 दलील:
۞ बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम ۞
📖 क़ुरआन:
“और जब इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने कहा:
‘ए मेरे रब! मुझे दिखा कि तू मुर्दों को कैसे ज़िंदा करेगा।’
अल्लाह ने फ़रमाया: ‘क्या तुझे यक़ीन नहीं?’
इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने कहा: ‘क्यों नहीं, मगर (मैं चाहता हूँ कि) मेरा दिल पूरी तरह मुतमइन (सुकून) हो जाए।’
अल्लाह ने फ़रमाया: ‘चार परिंदे पकड़ लो, उन्हें टुकड़ों में काटकर हर पहाड़ पर रख दो, फिर उन्हें पुकारो — वो तुम्हारे पास दौड़ते हुए चले आएँगे। और जान लो कि अल्लाह ग़ालिब और हिकमत वाला है।’”
📕 सूरह अल-बक़रह (2), आयत 260
🌸 सीख:
इस वाक़िये से हमें पता चलता है कि ईमान और तसल्ली (दिल का सुकून) दोनों अलग चीज़ें हैं।
हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) पहले ही अल्लाह की क़ुदरत पर ईमान रखते थे, लेकिन उन्होंने यह देखा कि अल्लाह मुर्दों को कैसे ज़िंदा करता है — ताकि उनका दिल और भी मज़बूत ईमान से भर जाए।



