इस्लाम में मुसलमानों के बीच रिश्ता सिर्फ दोस्ती नहीं, बल्कि आइना जैसा होना चाहिए। आइए जानते हैं इस हदीस के मुताबिक इसका क्या मतलब है।
सवाल: हदीस के मुताबिक एक मुसलमान का दूसरे मुसलमान से रिश्ता क्या है?
- A. दोस्त
- B. दीवार
- C. आइना
- D. सही जवाब का इंतज़ार
सही जवाब है: ऑप्शन C , आइना
तफ़सील (विवरण):
दलील (हदीस से)
۞ हदीस: रसूल-ए-अकरम ﷺ ने फरमाया:
“मोमिन दूसरे मोमिन का आइना है और मोमिन दूसरे मोमिन का भाई है। जो नुक़सान को उससे दूर करता है और उसकी गैर-मौजूदगी में उसकी हिफाज़त करता है।”
📕 सुनन अबू दावूद , वॉल -3, हदीस 1486
व्याख्या
- आइने की तरह हम अपने भाई मुसलमान के अच्छाई और कमज़ोरी को साफ़ तौर पर दिखा सकते हैं, बिना उसे नुकसान पहुँचाए।
- जैसे आइना केवल सच्चाई दिखाता है और किसी को बेवकूफ़ नहीं बनाता, वैसे ही मुसलमान को अपने भाई की इस्लाही नसीहत करनी चाहिए।
- यह रिश्ता भरोसा, मदद और हिफाज़त पर आधारित होता है।
♥ सुब्हानल्लाह ! यह कितनी सुंदर और नायाब मिसाल है मुसलमानों के आपसी रिश्ते के लिए।
नसीहत
- अपने भाई मुसलमान की अच्छाई और कमज़ोरी को सही तरीके से पेश करें।
- किसी की आबरू या नाम बदलने की कोशिश न करें, बल्कि मदद और सलाह दें।
- अल्लाह से दुआ करें कि हम सभी को नेक और ईमानदार बनाएं, और हमारे रिश्तों को मजबूत करें।

