इस्लाम में क़ुरबानी अल्लाह की एक महत्वपूर्ण इबादत है। लेकिन हर जानवर क़ुरबानी के लिए जायज़ नहीं होता। आइए जानते हैं कि क़ुरबानी के लिए कौन सा जानवर जायज़ नहीं है और इस बारे में हदीस में क्या हुक्म दिया गया है।
सवाल: इनमें से कौन सा जानवर क़ुरबानी के लिए जायज़ नहीं है?
- A. ख़स्सी
- B. दूध देने वाला
- C. कमज़ोर
- D. सही जवाब का इंतज़ार
सही जवाब है: ऑप्शन C , कमज़ोर
तफ़सील (विवरण):
📜 दलील (हदीस से)
हदीस:
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
“चार तरह के जानवर क़ुरबानी में जायज़ नहीं:
- काना (जिसका काना पन ज़ाहिर हो)
- लंगड़ा (जिसका लंगड़ापन वाज़ेह हो)
- मरीज़ (जिसका मर्ज़ साफ़ हो)
- इतना कमज़ोर जानवर कि उसमें गूदा तक न हो।”
📕 सुनन ान – नासै : 4376
हाफ़िज़ अल्लामा अल्बानी रहिमहुल्लाह ने इस हदीस को सह़ीह कहा है।
🕌 तफ़सीर और मसला
- इससे मालूम हुआ कि क़ुरबानी का जानवर तंदुरुस्त और क़वी होना चाहिए।
- ख़स्सी, गाभिन और दूध देने वाले जानवर की क़ुरबानी जायज़ है।
- अगर जानवर खरीदने के बाद उसमें कोई ऐब पैदा हो जाए (जैसे दांत टूट जाना, सींग टूट जाना, टांग टूट जाना, कान कट जाना या बीमार पड़ना), तो उसकी क़ुरबानी की जा सकती है क्योंकि यह इंसान के क़ाबू में नहीं।
- लेकिन अगर इंसान के पास ताक़त हो और हदीस में बताए गए इन चार ऐबों में से कोई बड़ा ऐब खरीदने के बाद आ जाए, तो बेहतर है कि दूसरा जानवर ख़रीदकर क़ुरबानी करे।
⚖️ क़ुरबानी के जानवर से जुड़ी अहकाम
- क़ुरबानी का जानवर मुसिन्नाह (दांत वाला) होना चाहिए यानी जिसके दूध के आगे के दांत गिरकर निकल आए हों।
- क़ुरबानी के लिए मुक़र्रर किए गए जानवर को बेचना, हदिया करना या गिरवी रखना जायज़ नहीं।
- ऐसे जानवर का इस्तेमाल बार-बारदारी (सामान ढोने) के लिए करना भी मना है।
🤲 दुआ
- ऐ अल्लाह! हमें तंदुरुस्त और हलाल जानवर से तेरा हुक्म पूरा करने की तौफ़ीक़ दे।
- हमारी क़ुरबानियों को अपनी बारगाह में क़बूल फ़रमा।
आमीन 🌹



