हर उम्मत को अल्लाह तआला ने किसी न किसी चीज़ में आज़माया। उम्मते मोहम्मदिया ﷺ की आज़माइश भी अल्लाह ने एक ख़ास चीज़ में रखी है, ताकि यह देखा जाए कि मुसलमान किस तरह उस पर अमल करता है।
सवाल: हर उम्मत की आज़माइश किसी न किसी चीज़ में है, उम्मते मोहम्मदिया ﷺ की आज़माइश किस चीज़ में है?
- A. बीमारी
- B. माल
- C. इल्म
- D. ग़ुरबत
सही जवाब है: ऑप्शन B , माल
तफ़सील (विवरण):
📜 दलील
۞ मफ़हूम-ए-हदीस:
अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया:
“हर उम्मत की आज़माइश किसी न किसी चीज़ में है और मेरी उम्मत की आज़माइश माल में है।”
📕 जामे तिर्मिज़ी : 2336
🕌 नसीहत
उम्मते मोहम्मदिया ﷺ की आज़माइश माल है। यानी अल्लाह देखता है कि जब इंसान को माल मिले तो क्या वह शुकर करता है या घमंड, लालच और ग़फ़लत में पड़ जाता है। मुसलमान को चाहिए कि वह माल को हलाल तरीक़े से कमाए और उसे अल्लाह की राह में खर्च करे।

