कभी-कभी छोटी-सी बातें हमारे ईमान और पहचान को ज़ाहिर करती हैं। इस्लाम में साफ-सफाई और सुन्नत पर अमल करना बहुत अहम है। ऐसी ही एक बात के बारे में रसूलअल्लाह ﷺ ने फरमाया कि जो व्यक्ति अपनी मूंछों के बाल नहीं काटता, वह हम में से नहीं।
सवाल: रसूलअल्लाह ﷺ ने फरमाया: “वो हम में से नहीं जो क्या नहीं करता”
- A. अपनी मूंछों के बाल न काटे
- B. रोज़ मिस्कीनों को खाना न खिलाए
- C. जुमे का ख़ुत्बा न सुने
- D. जमात के साथ नमाज़ न पढ़े
सही जवाब है: ऑप्शन A , अपनी मूंछों के बाल न काटे
तफ़सील (विवरण):
📜 दलील:
۞ बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम ۞
हदीस:
हज़रत ज़ैद बिन अर्कम (रज़ि.) से रिवायत है —
रसूलअल्लाह ﷺ ने फरमाया:
“जो व्यक्ति अपनी मूंछों के बाल न काटे, वह हम में से नहीं।”
📖 सुनन नसाई, खंड 1, हदीस 13 (सहीह)
एक दूसरी हदीस में:
अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ि.) से रिवायत है:
रसूलअल्लाह ﷺ ने फरमाया:
“मूंछों को अच्छी तरह से छोटा करो और दाढ़ी को बढ़ाओ।”
📖 सहीह बुखारी, खंड 7, हदीस 5893
💭 सीख:
इस हदीस से हमें यह सिखने को मिलता है कि सुन्नत के अनुसार मूंछों को छोटा रखना और दाढ़ी को बढ़ाना मुसलमान की पहचान है। यह न केवल साफ-सफाई और तहमंदारी की निशानी है बल्कि अल्लाह के रसूल ﷺ के तरीक़े पर चलने की भी दलील है।



